N1Live Punjab मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली कैबिनेट द्वारा पंजाब भर की अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने से संबंधित संशोधन को मंजूरी*
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मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली कैबिनेट द्वारा पंजाब भर की अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने से संबंधित संशोधन को मंजूरी*

Approval of the amendment regarding the regularization of unauthorized colonies across Punjab by the Cabinet led by Chief Minister Bhagwant Singh Mann.

अनिल भारद्वाज

चंडीगढ़ 2 जून | पंजाब भर में अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले हजारों निवासियों को बड़ी राहत देने के उद्देश्य से अहम फैसले के तहत मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अध्यक्षता में पंजाब कैबिनेट ने प्रदेश भर में योग्य अनधिकृत कॉलोनियों को रेगुलर करने की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए पंजाब अपार्टमेंट एंड प्रॉपर्टी रेगुलेशन (पीएपीआर) नियमों के नियम 31 में संशोधन को मंजूरी दे दी।

इस संबंध में फैसला मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान लिया गया।

*अनधिकृत कॉलोनियों के निवासियों के लिए राहत*

इस संबंध में विवरण साझा करते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय ने कहा कि नियम 31 में संशोधन से उन अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित किया जा सकेगा, जहां कम से कम 25 प्रतिशत प्लॉट पहले ही बनाए जा चुके हैं। इस संबंध में आवेदन कॉलोनी के प्रमोटर या रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के माध्यम से जमा करवाए जा सकते हैं।

संशोधित उपबंध नोटिफाइड स्थानीय योजना क्षेत्रों के अंतर्गत स्थित योग्य कॉलोनियों और मास्टर प्लान के तहत निर्धारित कृषि भूमि पर भी लागू होंगे, लेकिन गमाडा के क्षेत्रीय योजना के अंतर्गत आने वाले प्लॉटों के लिए यह संशोधन लागू नहीं होगा। संशोधित नियमों के तहत आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 30 सितंबर, 2026 निर्धारित की गई है। अनधिकृत कॉलोनियां जिनके आवेदन पिछली रेगुलराइजेशन नीतियों के तहत रद्द कर दिए गए थे, वे भी संशोधित नियमों के तहत आवेदन करने के योग्य होंगी।

पूर्ण एवं बिल्कुल सही आवेदनों को 30 दिनों के भीतर अस्थायी रेगुलराइजेशन प्रमाणपत्र जारी किए जाएंगे, जबकि संशोधित नियमों के तहत प्राप्त सभी आवेदनों का छह महीने के भीतर निपटारा कर दिया जाएगा।

आवासीय और औद्योगिक कॉलोनियों को नियमित करने के लिए कॉलोनी के कुल क्षेत्र पर प्रचलित कलेक्टर दर के पांच प्रतिशत के बराबर कंपाउंडिंग शुल्क अदा करना होगा, जबकि वाणिज्यिक कॉलोनियों के लिए प्रचलित वाणिज्यिक कलेक्टर दर के 10 प्रतिशत के बराबर कंपाउंडिंग शुल्क देना होगा।

अस्थायी रेगुलराइजेशन प्रमाणपत्र जारी करने और निर्धारित रेगुलराइजेशन शुल्क के भुगतान के बाद व्यक्तिगत प्लॉट धारक अपने संबंधित प्लॉटों के लिए रेगुलराइजेशन प्रमाणपत्र प्राप्त करने और प्रचलित भवन नियमों के अनुसार मंजूरी प्राप्त करने के योग्य हो जाएंगे। प्लॉट धारक निर्धारित रेगुलराइजेशन शुल्क जमा करने के बाद अपने प्लॉटों को पंजीकृत भी कर सकेंगे।

जहां रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशनों के माध्यम से जमा करवाए गए आवेदनों पर रेरा के उपबंध लागू नहीं होंगे। वहां प्रमोटर या रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन, सक्षम अधिकारियों से सभी आवश्यक मंजूरियां और कोई आपत्ति नहीं प्रमाणपत्र प्राप्त करने और निर्धारित समय के भीतर लंबित विकास कार्यों को पूरा करने के लिए जिम्मेदार होंगे।

इस दौरान कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली कैबिनेट ने उन अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने का फैसला किया है, जहां कम से कम 25 प्रतिशत प्लॉट पहले ही बनाए जा चुके हैं। उन्होंने कहा, “सरकार ने आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 30 सितंबर, 2026 निर्धारित की है। वे अनधिकृत कॉलोनियां भी, जिनके आवेदन पिछली रेगुलराइजेशन नीतियों के तहत रद्द कर दिए गए थे, अब संशोधित नियमों के तहत आवेदन करने के योग्य होंगी।”

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