फिल्म निर्माता-निर्देशक विवेक रंजन अग्निहोत्री अक्सर विचारों से भरे पोस्ट के साथ प्रशंसकों से सोशल मीडिया के जरिए जुड़े रहते हैं। इसी कड़ी में उन्होंने कला को लेकर अपने विचार व्यक्त किए।
उन्होंने कला और समाज के गहरे संबंधों पर रोशनी डालते हुए अपने विचार साझा किए। ‘द कश्मीर फाइल्स’ जैसे गंभीर फिल्म के निर्देशक विवेक रंजन अग्निहोत्री अक्सर सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखते हैं। उनका यह मानना है कि कलाकारों की जिम्मेदारी सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि वे समाज की चेतना को आकार देने और भविष्य की नींव रखने का काम भी करते हैं।
अग्निहोत्री ने समझाया कि संस्कृति, कहानियां और कला समाज को कैसे दिशा देती हैं। असली बदलाव बाहरी नियमों से नहीं, बल्कि अंदरूनी सोच और कल्पना से शुरू होता है। उन्होंने इस विषय को समझाते हुए इंस्टाग्राम पर लिखा, “कला इंसानी चेतना का गठन है और कलाकार दुनिया के असली कानून बनाने वाले हैं।”
उन्होंने कहा, “आर्ट वह अदृश्य दस्तावेज है, जिससे अंततः सभी दृश्यमान कानून निकलते हैं।” उन्होंने आगे लिखा कि कोई भी समाज अपनी राजनीति बदलने से पहले अपनी कल्पना बदलता है। क्रांति सड़कों पर आने से बहुत पहले कहानियों, गानों, पेंटिंग्स, फिल्मों और मिथकों में दिखाई देने लगती है। कला वह जगह है जहां कोई सभ्यता अपने भविष्य की तैयारी करती है।
अग्निहोत्री के अनुसार, राजनीति व्यवहार को नियंत्रित करती है, जबकि कला अर्थ को नियंत्रित करती है। सरकार गुलामी के खिलाफ कानून बना सकती है, लेकिन कला लोगों को गुलामी बर्दाश्त न करने लायक बनाती है। उन्होंने कला को समाज का ‘ऑपरेटिंग सिस्टम’ बताते हुए कहा, “कला सपनों, डर, प्रतीकों और कहानियों को आकार देती है, जिनसे बाद में संस्थाएं और व्यवस्थाएं बनती हैं। राजनीति सभ्यता के नियम लिखती है, लेकिन कला उस आत्मा को लिखती है, जो उन नियमों को जन्म देती है।”

