N1Live National ‘चुनाव नजदीक आता है तो ये टीका, कलावा और मंदिर में शंख बजाने लगते हैं’, सपा पर दिनेश शर्मा का निशाना
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‘चुनाव नजदीक आता है तो ये टीका, कलावा और मंदिर में शंख बजाने लगते हैं’, सपा पर दिनेश शर्मा का निशाना

"As elections approach, they start sporting the *tilak* and *kalava*, and blowing conch shells in temples," says Dinesh Sharma, targeting the SP.

भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने समाजवादी पार्टी के राजनीतिक दावों, विपक्ष के कथित बयानों, पीएम मोदी की तारीफ और राम मंदिर जैसे मामलों पर प्रतिक्रिया दी है। अखिलेश यादव के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए दिनेश शर्मा ने कहा, “समाजवादी पार्टी की ओर से लगभग साढ़े चार साल तक ब्राह्मण, ब्राह्मणवाद और मनुवाद को गाली दी जाती है और जैसे ही चुनाव नजदीक आते हैं, इनके टीका, कलावा और मंदिरों में शंख बजने लगते हैं। सपा की ओर से आज तक सनातन एकता को लेकर कोई सकारात्मक वक्तव्य नहीं आया होगा।”

उन्होंने आगे कहा, “कभी कथावाचक को लेकर विवाद खड़ा किया जाता है, तो कभी कथावाचक का नाम लेकर यादवों और ब्राह्मणों के बीच विवाद पैदा करने की कोशिश की जाती है। अब इनका प्रेम चुनाव की वजह से जागा है। हर जाति भाजपा के साथ है, कोई भी भाजपा से अलग नहीं है। भाजपा ने सवर्णों के लिए काम किया है तो दलितों और पिछड़ों के लिए भी काम किया है।”

दिनेश शर्मा ने कहा, “सवर्ण समाज मंदिरों का सम्मान, भारत की संस्कृति का सम्मान और अपने बच्चों का सम्मान चाहता है। भाजपा ने यह सब सुनिश्चित किया है। आज यदि सपा या कांग्रेस लोगों को लुभाने की कोशिश कर रही हैं, तो यह केवल उनका रिहर्सल है। चुनाव से पहले वे हर बार ऐसा करती हैं और चुनाव हारने के बाद फिर गाली देने लगती हैं। इस बार उन्हें और ज्यादा गाली देनी पड़ेगी, क्योंकि कोई भी उन्हें वोट नहीं देगा।”

सपा में संभावित फूट के सवाल पर दिनेश शर्मा ने कहा, “ओम प्रकाश राजभर और केशव प्रसाद मौर्य महत्वपूर्ण नेता हैं। उनकी अपनी राजनीतिक पकड़ है। सपा, कांग्रेस, टीएमसी और शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों में असंतोष मैंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर मतदान के दौरान लोकसभा और राज्यसभा में देखा था।”

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा किए जाने पर दिनेश शर्मा ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी की बॉडी लैंग्वेज देखी जा सकती है। ऐसा लग रहा था मानो एक तना हुआ भारतीय शेर खड़ा हो। उन्होंने अपनी बात बराबरी के साथ और दृढ़तापूर्वक रखी। अमेरिकी राष्ट्रपति की मौजूदगी में भी उन्होंने अपनी आपत्ति दर्ज कराई। अब भारत न दबता है, न दबाता है और न डरता है, न डराता है। भारत अब सीना तानकर बराबरी से बात करता है।”

राम मंदिर मामले पर उन्होंने कहा, “जब कोई जांच होती है तो उसके विश्लेषण और निष्कर्ष निकालने का अधिकार जांच समिति को होता है। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए स्वयं ट्रस्ट की ओर से आग्रह किया गया, जिसके बाद सरकार ने एक निष्पक्ष एसआईटी का गठन किया है। परिणाम आने दीजिए।”

मानसून सत्र को लेकर उन्होंने कहा कि सरकार जवाबदेही है। सरकार की ओर से जो कहा जाता है, उसको पूरा भी किया जाता है। विकसित भारत की संकल्पना की ओर हम लोग बढ़ रहे हैं। शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत के बयान पर उन्होंने कहा कि उनकी भाषा सड़कछाप है। अपनी भाषा की वजह से दर-दर भटकने के लिए उनको मजबूर होना पड़ेगा। संजय राउत की बात पर किसी को विश्वास नहीं होता।

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