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झारखंड में छात्रों पर हमला लोकतंत्र के लिए चिंताजनक, जेएमएम के दवाब में कांग्रेस चुप: संजय सेठ

Attack on students in Jharkhand is a cause for concern for democracy; Congress remains silent under JMM pressure: Sanjay Seth

झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए हमले को लेकर केंद्रीय राज्य मंत्री संजय सेठ ने राज्य सरकार और सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ कथित मारपीट को लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया और पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की।

संजय सेठ ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर जेएमएम कार्यकर्ताओं ने लाठियों से हमला किया। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या राजनीतिक कार्यकर्ताओं को कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि जिस तरह की कथित बर्बरता प्रदर्शन के दौरान हुई, उसने उन्हें आपातकाल की याद दिला दी। जेएमएम के कार्यकर्ता लाठी लेकर छात्रों पर इस तरह टूट पड़े, जैसे वे किसी गंभीर अपराध में शामिल हों।

एक छात्रा के साथ कथित दुर्व्यवहार का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मैंने इसका फुटेज देखा है। संजय सेठ ने सवाल किया कि आखिर छात्रों के साथ इस तरह का व्यवहार क्यों किया गया। केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि लोकतंत्र केवल सत्ता से नहीं, बल्कि लोक-लाज और जवाबदेही से चलता है। उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड में सत्ता के लिए लोकतांत्रिक मर्यादाओं को दरकिनार किया जा रहा है।

संजय सेठ ने इस मामले को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड में प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई की आवाज राहुल गांधी तक नहीं पहुंची या उन्होंने इस पर प्रतिक्रिया नहीं दी। उन्होंने कहा कि पहले भी जब प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस और वॉटर कैनन का इस्तेमाल हुआ था, तब भी राहुल गांधी की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। कांग्रेस पर दोहरा चरित्र अपनाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि झारखंड में राजनीतिक समीकरणों के कारण कांग्रेस राज्य सरकार के खिलाफ बोलने से बच रही है।

उन्होंने कहा कि अगर राहुल गांधी की लोकतांत्रिक मुद्दों को लेकर वास्तव में चिंता है, तो उन्हें झारखंड आकर प्रदर्शनकारी छात्रों से मिलना चाहिए और पूरे मामले पर सरकार से जवाब मांगना चाहिए। सेठ ने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान हुई कार्रवाई का वीडियो लंबे समय तक टीवी चैनलों पर प्रसारित हुआ। उन्होंने कहा कि देश ने पहली बार ऐसा दृश्य देखा, जहां कई टीवी चैनलों पर घंटों तक लाठीचार्ज की तस्वीरें लाइव दिखाई गईं। जब पूरा देश घटना की तस्वीरें देख रहा था, तब भी कांग्रेस नेतृत्व की ओर से कोई प्रभावी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। उन्होंने राहुल गांधी से प्रदर्शनकारी छात्रों और घायलों से मिलने की अपील की।

संजय सेठ ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान घायल हुए छात्रों को अस्पतालों से कथित तौर पर दबाव डालकर डिस्चार्ज कराया गया। उन्होंने कहा कि रिम्स, सदर और पारस सहित जिन अस्पतालों में घायल छात्र भर्ती थे, वहां जाकर स्थिति की जानकारी ली जानी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि कुछ घायल छात्रों को कथित पुलिसिया दबाव में अस्पताल से डिस्चार्ज कराया गया। संजय सेठ ने सवाल किया कि अगर कोई छात्र घायल है तो उसे इलाज की जरूरत है, ऐसे में उसे कथित दबाव में अस्पताल से क्यों निकाला गया। इन सभी आरोपों की स्वतंत्र जांच जरूरी है और इसी वजह से वह पूरे मामले में CBI जांच की मांग कर रहे हैं।

जेपीएससी के कामकाज को लेकर चिंता जताते हुए संजय सेठ ने पूर्व वरिष्ठ अधिकारी नीलिमा केरकेट्टा के एक पत्र का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि करीब दो वर्ष पहले रिटायरमेंट के समय नीलिमा केरकेट्टा ने सरकार को दो पन्नों का पत्र लिखकर आयोग के कामकाज को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे। सेठ ने बताया कि उस पत्र में आयोग के भीतर कथित अनियमितताओं और फाइलों के लंबे समय तक लंबित रहने का उल्लेख किया गया था। कुछ सदस्य पांच से छह महीने तक फाइलें रोककर रखते थे और पत्र में आयोग के कामकाज से जुड़ी कई अन्य बातें भी लिखी गई थीं।

केंद्रीय राज्य मंत्री ने सवाल उठाया कि अगर सरकार के पास ऐसा पत्र आया था, तो उस पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। उन्होंने पूछा कि नीलिमा केरकेट्टा के पत्र को कथित तौर पर दबाकर क्यों रखा गया। अगर नीलिमा केरकेट्टा के पत्र पर दो साल पहले ही गंभीरता से कार्रवाई कर दी गई होती, तो आज जेपीएससी को लेकर इस तरह के विवाद सामने नहीं आते।

उन्होंने सरकार से सवाल किया कि वरिष्ठ अधिकारी द्वारा उठाए गए सवालों की जांच क्यों नहीं कराई गई। उन्होंने यह भी पूछा कि यदि जेपीएससी के कामकाज को लेकर पहले से शिकायतें थीं, तो उन्हें दूर करने के लिए क्या कदम उठाए गए। उन्होंने यह भी दावा किया कि यह लगभग एक हजार करोड़ रुपए का घोटाला है। सेठ ने आगे कहा कि सरकार ने बच्चों के भविष्य को बेचने का काम किया है। इस मामले में सीबीआई जांच होनी ही चाहिए।

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