हिमाचल प्रदेश के पीडब्ल्यूडी मंत्री विक्रमदित्य सिंह द्वारा उत्तर प्रदेश और बिहार के नौकरशाहों के खिलाफ की गई टिप्पणी एक बड़े राजनीतिक विवाद में तब्दील हो गई है, जिसमें कई कैबिनेट सहयोगियों ने बयान को अनुचित और दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने इन टिप्पणियों को एक “व्यापक बयान” बताया जो अधिकारियों के लिए निराशाजनक है। हालांकि, ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने इससे भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि मंत्रियों में काम करवाने की सूझबूझ होनी चाहिए।
अनिरुद्ध सिंह ने कहा, “अगर किसी को काम करवाना नहीं आता, तो यह उनकी कमी है, सरकार की नहीं।” उन्होंने आगे कहा कि बिना सोचे-समझे बयान देना और अधिकारियों को दोषी ठहराना अपनी गलतियों को छिपाने का एक तरीका है। उन्होंने कहा, “मेरे विभाग में अधिकांश अधिकारी राज्य के बाहर से हैं, फिर भी हमें कोई समस्या नहीं हुई है। ऐसे बयान अधिकारियों का मनोबल गिराते हैं और सरकार की छवि पर बुरा असर डालते हैं।”
अनिरुद्ध सिंह ने आगे कहा कि यदि किसी मंत्री में मामलों को प्रभावी ढंग से संभालने की क्षमता हो तो कोई भी अधिकारी कानूनी कार्यों में बाधा नहीं डालेगा। उन्होंने जोर देकर कहा, “यदि आप काम करवाने की सूझबूझ रखते हैं, तो कोई भी अधिकारी किसी भी कानूनी कार्य को नहीं रोकेगा।” मंगलवार को विक्रमदित्य सिंह ने उत्तर प्रदेश और बिहार के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों पर राज्य के हित में काम न करने का आरोप लगाया था और मनमाने ढंग से धन वितरण का आरोप लगाया था।

