पश्चिम बंगाल में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव के लिए सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेस (सीएपीएफ) की तैनाती पिछले चुनावों की तुलना में दोगुनी हो सकती है। पिछले चार चुनावों, 2016 और 2021 के विधानसभा और 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव, में सीएपीएफ की तैनाती औसतन 1,000 कंपनियों की होती थी। लेकिन, इस बार अगर चुनाव सिर्फ एक या दो चरणों में होते हैं, तो यह संख्या 2,000 कंपनियों तक पहुंच सकती है।
पश्चिम बंगाल के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर (सीईओ) मनोज कुमार अग्रवाल ने सोमवार को नई दिल्ली में चुनाव आयोग के मुख्यालय में हुई बैठक में यह जानकारी दी। इस बैठक की अध्यक्षता चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार ने की।
बैठक का मुख्य एजेंडा इस साल विधानसभा चुनाव के लिए सीएपीएफ की तैनाती और सुरक्षा इंतजामों पर चर्चा करना था। सीईओ ने कहा कि यदि चुनाव एक या दो चरणों में संपन्न कराया जाता है, तो सुरक्षा के लिए ज्यादा फोर्स की जरूरत होगी।
सीईओ ऑफिस के सूत्रों के अनुसार, एक या दो चरणों में चुनाव कराने के अपने फायदे और नुकसान दोनों हैं। सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि राजनीतिक पार्टियां अपने समर्थकों को एक इलाके से दूसरे इलाके में जल्दी नहीं भेज पाएंगी। इससे वोटरों को डराने-धमकाने या बाहरी लोगों को लेकर आने जैसी पुरानी शिकायतों पर भी रोक लगेगी।
लेकिन, नुकसान यह है कि एक या दो चरणों में चुनाव कराने के लिए सीएपीएफ की बड़ी तैनाती की जरूरत होगी, खासकर मतदान के दिन। सूत्रों के अनुसार, अगर आयोग इस तैनाती की व्यवस्था कर सकता है, तो एक या दो चरणों में चुनाव करवाना पूरी तरह संभव है।
पिछले चार चुनावों में मतदान सात-आठ चरणों में हुआ था, इसलिए फोर्स की जरूरत कम थी। इस बार चरणों की संख्या कम होने की वजह से सुरक्षा व्यवस्था को दोगुना करना पड़ेगा। चुनाव आयोग इस बार एक या दो चरणों में मतदान कराने पर विचार कर रहा है। यह कदम मतदाता सुरक्षा और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए जरूरी माना जा रहा है।


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