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वाराणसी में भूटान का बौद्ध धाम बनेगा आस्था और कूटनीति का नया केंद्र, 1 रुपए वार्षिक किराए पर 30 साल के लिए मिली दो एकड़ जमीन

Bhutan's Buddhist center in Varanasi set to become a new hub of faith and diplomacy; two acres of land acquired on a 30-year lease at an annual rent of ₹1.

10 जून । उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी में भारत-भूटान संबंधों को नई ऊंचाई देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। भूटान सरकार को बौद्ध मंदिर एवं गेस्ट हाउस निर्माण के लिए दो एकड़ भूमि 30 वर्ष की लीज पर उपलब्ध कराई जाएगी। महज एक रुपए वार्षिक किराये पर हुए इस समझौते को प्रदेश में धार्मिक पर्यटन, बौद्ध परिपथ के विस्तार और अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक सहयोग के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

सरकार का मानना है कि इससे सारनाथ और वाराणसी में देश-विदेश से आने वाले बौद्ध श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह और अपर मुख्य सचिव पर्यटन अमृत अभिजात की उपस्थिति में बुधवार को पर्यटन विभाग और रॉयल गवर्नमेंट ऑफ भूटान के बीच लीज डीड एग्रीमेंट (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। वाराणसी के अजईपुर, परगना कोलअसला, तहसील पिंडरा स्थित प्राइम लोकेशन की दो एकड़ भूमि भूटान सरकार को बौद्ध मंदिर एवं अतिथि गृह निर्माण के लिए उपलब्ध कराई जाएगी। भूमि हस्तांतरण से संबंधित सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं।

भूटान सरकार की ओर से नई दिल्ली स्थित रॉयल भूटानी दूतावास की उप-मिशन प्रमुख ताशी पेल्डन ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस दौरान चांसरी प्रमुख सांगे थिनले और काउंसलर (वित्त) चिमी वांगमों गवाह के रूप में मौजूद रहीं। पर्यटन विभाग की ओर से विशेष सचिव मृदुल चौधरी ने हस्ताक्षर किए तथा दोनों पक्षों के अधिकारियों के बीच अभिलेखों का आदान-प्रदान हुआ।

इस अवसर पर पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने भूटान सरकार के प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि भारत और भूटान के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं। यह समझौता दोनों देशों के रिश्तों को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि सारनाथ पहले से ही बौद्ध धर्म के सबसे महत्वपूर्ण प्रेरणास्थलों में शामिल है। यहां भूटान द्वारा बौद्ध मंदिर और गेस्ट हाउस का निर्माण होने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी पहचान और मजबूत होगी तथा बड़ी संख्या में बौद्ध श्रद्धालु वाराणसी पहुंचेंगे।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार बौद्ध परिपथ के विकास को विशेष प्राथमिकता दे रही है। संकिसा, कुशीनगर और अन्य प्रमुख बौद्ध स्थलों पर उच्च स्तरीय पर्यटन एवं आधारभूत सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी इसी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिससे विदेशी पर्यटकों की पहुंच आसान हुई है।

जयवीर सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश अपनी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और प्राकृतिक धरोहरों के कारण देश का प्रमुख पर्यटन केंद्र बनकर उभर रहा है। सारनाथ न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह बौद्धिक और दार्शनिक विरासत का भी वैश्विक केंद्र है। भूटान सरकार की इस परियोजना से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और विदेशी पर्यटकों की आमद में वृद्धि होगी।

उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि वर्ष 2017 के बाद पर्यटन विभाग द्वारा किए गए सभी एमओयू की समीक्षा की जाए तथा ‘विजिट माई स्टेट’ अभियान को युद्धस्तर पर संचालित किया जाए, ताकि प्रदेश में पर्यटन निवेश और पर्यटकों की संख्या में और बढ़ोतरी हो सके। भूटान सरकार की प्रतिनिधि ताशी पेल्डन ने उत्तर प्रदेश सरकार और पर्यटन विभाग का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह समझौता भारत और भूटान के बीच सांस्कृतिक एवं कूटनीतिक संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करेगा तथा दोनों देशों के बीच सहयोग के नए अवसर खोलेगा।

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