हिमाचल प्रदेश की पहली द्वीप पर्यटन परियोजना अगले महीने बिलासपुर के पास गोविंद सागर झील में स्थित जियोरी पट्टन में शुरू हो जाएगी। उपायुक्त राहुल कुमार ने शुक्रवार को बिलासपुर में पर्यटन, खेल, व्यापार और रोजगार सृजन समिति की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए यह घोषणा की।
उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य बिलासपुर को पर्यावरण पर्यटन, जल क्रीड़ा, हवाई क्रीड़ा और साहसिक पर्यटन के एक प्रमुख केंद्र में बदलना है। इस परियोजना में गोविंद सागर झील में प्राकृतिक रूप से बने द्वीपों को विश्व स्तरीय पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की गई है। ये द्वीप प्रकृति-आधारित आवास के साथ-साथ पारंपरिक व्यंजन भी उपलब्ध कराएंगे, जिससे आगंतुकों को पूर्व केहलूर रियासत की समृद्ध पाक विरासत का अनुभव करने का अवसर मिलेगा।
गौरतलब है कि इस परियोजना की परिकल्पना तत्कालीन उप आयुक्त आबिद हुसैन सादिक ने 2024 में की थी, लेकिन उनके तबादले के बाद यह परियोजना ठप पड़ी रही।
राहुल कुमार ने बताया कि पर्यटक प्री-वेडिंग फोटोशूट, मछली पकड़ने, स्थानीय दर्शनीय स्थलों की सैर और कई तरह के साहसिक एवं मनोरंजक गतिविधियों का आनंद ले सकेंगे। हिमाचली लोक संगीत और पारंपरिक प्रस्तुतियों से सजी सांस्कृतिक संध्याएं झील के आसपास आने वाले पर्यटकों के अनुभव को और भी बेहतर बनाएंगी।
उन्होंने कहा कि स्थानीय हस्तशिल्प, कृषि उत्पाद और अन्य पारंपरिक उत्पादों की बिक्री के लिए विशेष स्थान बनाए जाएंगे। इससे स्वयं सहायता समूहों, स्थानीय कारीगरों, शिल्पकारों और उद्यमियों को अपने उत्पादों को सीधे पर्यटकों को बेचने में मदद मिलेगी, जिससे आजीविका के स्थायी अवसर पैदा होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
उपायुक्त ने कहा कि गोविंद सागर झील के प्रमुख द्वीप, जिनमें जियोरी पट्टन, धररसानी और भोलू शामिल हैं, का विकास अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की तर्ज पर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह परियोजना हिमाचल प्रदेश में अपनी तरह की पहली परियोजना है और इससे राज्य के पर्यटन क्षेत्र को एक नया आयाम मिलने की उम्मीद है।
बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त रुपिंदर कौर, एसडीएम (सदर) राजकुमार, विभिन्न विभागों के अधिकारी और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े हितधारक उपस्थित थे।

