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जन्मदिन विशेष : सालों गायब रहने के बाद अक्षय खन्ना ने कैसे किया धमाकेदार कमबैक?

Birthday Special: How did Akshay Khanna make a grand comeback after being missing for years?

28 मार्च । दिसंबर 2025 में आई आदित्य धर की मेगा-ब्लॉकबस्टर ‘धुरंधर’ में जब अक्षय खन्ना ने कराची के खूंखार डॉन का किरदार निभाया, तो ‘रहमान डकैत’ का रोल दर्शकों को खूब भाया।

आपको जानकर हैरानी होगी कि बॉलीवुड के कई ए-लिस्टर एक्टर्स ने यह रोल ठुकरा दिया था। पर अक्षय खन्ना ने इस चुनौती को स्वीकार किया। जब ‘धुरंधर’ पर्दे पर आई, तो उनके ‘रहमान डकैत’ का किरदार ने सबके रोंगटे खड़े कर दिए। फिल्म में उनका स्वैग भरा डांस जेन-जी के लिए एक नए एंथम जैसा बन गया।

साल 2025 में ही ‘छावा’ में उनके ‘औरंगजेब’ के किरदार ने भी क्रिटिक्स को दांतों तले उंगलियां दबाने पर मजबूर कर दिया।

लेकिन 51 साल के इस ‘शोस्टॉपर’ की कहानी किसी आम सुपरस्टार जैसी नहीं है। दिवंगत अभिनेता विनोद खन्ना के पुत्र अक्षय खन्ना ने उस दौर में बॉलीवुड में कदम रखा, जब सिनेमा के पर्दे पर संवादों का शोर और ओवर-द-टॉप एक्टिंग का बोलबाला था। साल 1997 में अपनी पहली फिल्म ‘हिमालय पुत्र’ की असफलता के बाद, महज 21 वर्षीय अक्षय ने जे.पी. दत्ता की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘बॉर्डर’ से अपनी एक विशिष्ट पहचान स्थापित की। फिल्म के अंतिम दृश्यों में शौर्य और अदम्य साहस का परिचय देते ‘धर्मवीर भाकरी’ के किरदार ने दर्शकों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ी।

हालांकि, 28 मार्च 1975 को मुंबई में जन्मे अक्षय खन्ना के करियर का सबसे निर्णायक मोड़ साल 2001 में फरहान अख्तर की फिल्म ‘दिल चाहता है’ के साथ आया। जिस दौर में उनके समकालीन अभिनेता मारधाड़ वाले किरदारों में व्यस्त थे, उस समय अक्षय ने ‘सिद्धार्थ’ के रूप में एक बेहद शांत और परिपक्व प्रेमी की भूमिका निभाई। कैनवास पर रंगों से बातें करने वाले ‘सिड’ का अपनी उम्र से बड़ी एक तलाकशुदा महिला के प्रति वह मूक और निश्छल प्रेम, हिंदी सिनेमा के सबसे संजीदा किरदारों में शुमार हो गया।

उनकी आंखों की उदासी ने हिंदी सिनेमा में एक नए ‘संवेदनशील मर्द’ की परिभाषा गढ़ी। इस फिल्म में उनके शानदार अभिनय के लिए उन्हें फिल्मफेयर का सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार मिला था।

‘हमराज’, ‘हंगामा’, ‘रेस’ जैसी फिल्मों में अपनी विलेनरी और कॉमेडी का लोहा मनवाने के बाद, और ‘गांधी, माई फादर’ जैसी फिल्म में ऐतिहासिक अभिनय करने के बावजूद एक दौर ऐसा आया जब अक्षय खन्ना अचानक गायब हो गए।

2012 से 2016 के बीच, पूरे 4 साल तक वो पर्दे से दूर रहे। कास्टिंग डायरेक्टर्स की लिस्ट से मानो जैसे उनका नाम काट दिया गया था।

लेकिन, ‘इत्तेफाक,’ ‘मॉम’ और ‘दृश्यम 2’ के तेज-तर्रार पुलिस वाले के तौर पर उन्होंने अपनी जबरदस्त वापसी की। इसी ताकत ने उन्हें अपनी दूसरी पारी में 2025 के उस शिखर तक पहुंचाया, जहां तक पहुंचना आसान नहीं था।

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