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होर्मुज में दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर के दोनों पायलट सुरक्षित : ट्रंप

Both pilots of helicopter crash in Hormuz safe: Trump

 

वाशिंगटन, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास एक अमेरिकी अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने की खबरों की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि दोनों पायलट सुरक्षित हैं।

रॉयटर्स के अनुसार, वाशिंगटन डीसी लौटने से पहले जॉन एफ कैनेडी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के रनवे पर मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए ट्रंप ने कहा, “पायलट पूरी तरह सुरक्षित हैं। इस घटना पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रशासन जारी करेगा, लेकिन फिलहाल मैं इतना कह सकता हूं कि दोनों पायलट ठीक हैं।”

इससे पहले, न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि अमेरिकी सेना का एक अपाचे गनशिप हेलीकॉप्टर होर्मुज के निकट दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हालांकि, हेलीकॉप्टर के गिरने के पीछे की वजह अभी तक स्पष्ट नहीं हो सकी है।

रिपोर्ट के अनुसार, दुर्घटना के बाद दोनों पायलटों को सफलतापूर्वक बचा लिया गया और वे सुरक्षित हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने फिलहाल घटना के कारणों पर कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है।

इसके साथ ही ट्रंप ने दावा किया है कि इजरायल और ईरान फिलहाल तनाव कम करने पर सहमत हो गए हैं और अगले एक सप्ताह तक एक-दूसरे के खिलाफ कोई नई सैन्य कार्रवाई नहीं करेंगे। उन्होंने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ हुई बातचीत के बाद ये बयान दिया।

पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा, “नेतन्याहू के साथ बेहद सकारात्मक चर्चा हुई। हालिया घटनाक्रम में इजरायल पर हमला हुआ था, जिसके जवाब में उसने भी कार्रवाई की। दोनों पक्ष अब फिलहाल संघर्ष को आगे नहीं बढ़ाना चाहते और कुछ समय के लिए एक-दूसरे को छोड़ देने पर सहमत हुए हैं।”

ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि “अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौता अंतिम चरण में पहुंच चुका है।” उनके मुताबिक यह समझौता ऐसा होगा जो किसी भी रूप में ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले दो से तीन दिनों में इस पर हस्ताक्षर हो सकते हैं।

राष्ट्रपति ने होर्मुज का भी जिक्र किया और कहा कि समझौते पर हस्ताक्षर होते ही यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पूरी तरह खुल जाएगा। ट्रंप ने ईरान पर दबाव बनाने के लिए अपनाई गई अमेरिकी रणनीति का बचाव करते हुए कहा कि सैन्य हमलों की तुलना में आर्थिक नाकेबंदी अधिक प्रभावी साबित हुई है। उन्होंने कहा, “अगर अमेरिका चाहे तो बड़े पैमाने पर बमबारी कर सकता है, लेकिन इससे भारी जान-माल का नुकसान होगा और क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ेगी।”

उनके अनुसार, बंदरगाहों पर लगाए गए प्रतिबंधों और आर्थिक दबाव के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा है। यही वजह है कि तेहरान अब समझौते की दिशा में आगे बढ़ने को तैयार दिखाई दे रहा है।

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