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बीआरओ की प्रोजेक्ट सेवक ने दीमापुर में मनाया अपना 66वां स्थापना दिवस

BRO's Project Sevak celebrated its 66th Raising Day in Dimapur

16 फरवरी । सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की प्रोजेक्ट सेवक ने रविवार को दीमापुर में अपना 66वां स्थापना दिवस मनाया। यह परियोजना पिछले छह दशकों से नागालैंड और मणिपुर जैसे रणनीतिक और भौगोलिक रूप से कठिन राज्यों में महत्वपूर्ण सेवाएं दे रही है।

1961 में शुरू हुई प्रोजेक्ट सेवक उत्तर-पूर्व क्षेत्र में सड़क और पुल जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास में अहम भूमिका निभा रही है। इससे सेना की तैयारी मजबूत हुई है और क्षेत्र के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिला है।

दीमापुर मुख्यालय वाली प्रोजेक्ट सेवक बीआरओ की सबसे पुरानी परियोजनाओं में से एक है। “सेवक” नाम का अर्थ है “सेवा करने वाला,” जो कठिन परिस्थितियों में भी सेवा करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इसका प्रतीक चिह्न “क्रॉस्ड नागा स्पीयर्स” नागा जनजातियों की वीरता और समृद्ध परंपरा को दिखाता है।

बीआरओ के आदर्श वाक्य “श्रम से सब कुछ संभव है” के मार्गदर्शन में प्रोजेक्ट सेवक ने कठिन पहाड़ी इलाकों, खराब मौसम और सुरक्षा चुनौतियों के बीच कई महत्वपूर्ण सड़कों और पुलों का निर्माण और रखरखाव किया है।

यह परियोजना भारत-म्यांमार सीमा क्षेत्र में संपर्क बढ़ाने और भारत की “एक्ट ईस्ट नीति” को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

इस अवसर पर मुख्य अभियंता ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की मेहनत और समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट सेवक आधुनिक तकनीक और बेहतर इंजीनियरिंग के जरिए भविष्य के लिए मजबूत बुनियादी ढांचा तैयार कर रहा है।

इंजीनियरिंग कार्यों के अलावा, यह परियोजना दूरदराज के सीमावर्ती गांवों में मेडिकल कैंप और विकास से जुड़ी गतिविधियों का आयोजन कर समाज की सेवा भी कर रही है।

प्रोजेक्ट सेवक ने देश के विकास, सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा मजबूत करने और राष्ट्र की सेवा के लिए अपने समर्पण को दोहराया है।

सीमावर्ती क्षेत्रों में संपर्क और रणनीतिक ढांचे को मजबूत करने के लिए भारत सरकार ने 1960 में सीमा सड़क संगठन की स्थापना की थी। शुरुआत में दो परियोजनाएं, ओंटस्कर (अब प्रोजेक्ट वर्तक) और बीकन, शुरू हुईं। बीआरओ अब 11 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में 18 परियोजनाएं चला रहा है। भूटान में भी इसकी उपस्थिति है।

बीआरओ विभागीय स्तर पर सड़क अवसंरचना परियोजनाएं पूरी करने की क्षमता रखता है, जिससे उसे अन्य निर्माण एजेंसियों पर विशेष बढ़त मिलती है।

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