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कलकत्ता हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी के वॉयस सैंपल से इनकार पर उठाए सवाल

Calcutta High Court raises questions over Abhishek Banerjee's refusal to provide a voice sample.

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से जुड़े कथित हेट स्पीच मामले में सीआईडी जांच के दौरान आवाज के नमूने देने में उनकी देरी और अनिच्छा पर सवाल उठाए हैं। अदालत ने पूछा कि जांच में सहयोग करने के लिए आवाज़ का नमूना देने में उन्हें आपत्ति क्यों है। यह मामला चुनाव के दौरान दिए गए कथित आपत्तिजनक भाषणों से जुड़ा हुआ है, जिसकी जांच सीआईडी कर रही है।

यह मामला एक चुनावी रैली से जुड़ा है, जिसमें बनर्जी पर हिंसा भड़काने वाले बयान देने और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को धमकी देने का आरोप लगाया गया है। सीआईडी इस मामले की जांच कर रही है। जांच के दौरान वीडियो में मौजूद भाषण की पुष्टि करने के लिए सीआईडी ने बनर्जी से उनकी आवाज के नमूने मांगे हैं।

यह घटनाक्रम बुधवार को नॉर्थ 24 परगना जिले की बिधाननगर कोर्ट में बनर्जी के पेश होने से पहले हुआ। जिला अदालत के पहले के आदेश के अनुसार, उन्हें ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट और फ़ोरेंसिक विशेषज्ञों की मौजूदगी में अपने आवाज के नमूने देने के लिए कहा गया है।

तय तारीख पर पेश होने से पहले राहत पाने के लिए अभिषेक बनर्जी के वकील ने जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की सिंगल बेंच के सामने एक याचिका पर तुरंत सुनवाई की मांग की। इस याचिका में जिला अदालत के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें उन्हें आवाज के नमूने देने का निर्देश दिया गया था।

हालांकि, जस्टिस भट्टाचार्य ने तुरंत सुनवाई करने से इनकार कर दिया और सवाल किया कि टीएमसी नेता जांच में सहयोग क्यों नहीं कर रहे हैं, जबकि उन्हें कलकत्ता हाईकोर्ट से 31 जुलाई तक गिरफ्तारी समेत पुलिस की सख्त कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा मिली हुई है।

कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी के वकील की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि आवाज के नमूने देने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि सांसद पहले ही मान चुके थे कि कैंपेन वीडियो में सुनाई देने वाली आवाज उन्हीं की थी।

याचिका का विरोध करते हुए राज्य सरकार ने कहा कि अभिषेक बनर्जी का आवाज के नमूने देने से इनकार करना जांच में सहयोग न करने को दर्शाता है। राज्य के वकील ने तर्क दिया कि रिकॉर्ड की गई बातचीत की प्रमाणिकता साबित करने और जांच पूरी करने के लिए नमूनों की फोरेंसिक जांच जरूरी थी।

सरकार ने कोर्ट को यह भी याद दिलाया कि पहले दी गई अंतरिम सुरक्षा की मुख्य शर्तों में से एक यह थी कि तृणमूल सांसद को जांच एजेंसी के साथ पूरा सहयोग करना होगा। अभियोजन पक्ष के अनुसार, आवाज के नमूने देना उस दायित्व का एक अहम हिस्सा था। दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद जस्टिस भट्टाचार्य ने मौखिक रूप से कहा कि चूंकि अभिषेक बनर्जी को किसी भी कठोर कार्रवाई से सुरक्षा मिली हुई है, इसलिए उन्हें जांचकर्ताओं का सहयोग करना चाहिए और बिना किसी देरी के अपने आवाज़ के नमूने देने चाहिए।

इसके बाद कोर्ट ने मामले की तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया और जिला अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली अभिषेक बनर्जी की याचिका पर सुनवाई के लिए अगली तारीख 10 जुलाई तय की है।

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