N1Live World ट्रंप के बयान के बाद कार्नी ने यूएस के हमले के जोखिम पर किया विचार: र‍िपोर्ट
World

ट्रंप के बयान के बाद कार्नी ने यूएस के हमले के जोखिम पर किया विचार: र‍िपोर्ट

 

वॉशिंगटन, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि उनकी सरकार ने अमेरिका के हमले की आशंका जैसे “चरम जोखिम” पर भी विचार किया था, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार यह कहा कि कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बन जाना चाहिए। उन्‍होंने कहा क‍ि भले ही ऐसी सैन्य स्थिति की संभावना बेहद कम हो, लेकिन प्रधानमंत्री के तौर पर हर तरह के जोखिम पर विचार करना उनकी जिम्मेदारी है।

कार्नी ने द न्यूयॉर्क टाइम्स से कहा, “मेरा मानना है कि ऐसी जिम्मेदारी वाले पद पर रहते हुए आपको बेहद कम संभावना वाले, लेकिन गंभीर जोखिमों पर भी विचार करना पड़ता है। यह सिर्फ जोखिम से निपटने की तैयारी है। हम इसे सामान्य या सबसे संभावित स्थिति नहीं मानते। ऐसा न करना गैर-जिम्मेदाराना होता।”

फॉक्स न्यूज ने गुरुवार को कार्नी के इस बयान की जानकारी दी। यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब टैरिफ और अमेरिका पर अपनी आर्थिक निर्भरता कम करने की कनाडा की कोशिशों को लेकर वॉशिंगटन और ओटावा के संबंधों में नया तनाव पैदा हुआ है।

कार्नी की टिप्पणी से पहली बार साफ तौर पर यह संकेत मिला कि कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने को लेकर ट्रंप के बयानों के बाद कनाडा सरकार के उच्च स्तर पर संभावित हालात से निपटने की तैयारी पर विचार किया गया था।

हालांकि, कार्नी ने साफ किया कि उनकी सरकार अमेरिका के हमले को संभावित नतीजा नहीं मानती। फिर भी अमेरिका के साथ बिगड़ते रिश्तों से पैदा हो सकने वाले जोखिमों की तैयारी के तहत इस संभावना पर भी विचार किया गया। अमेरिका कनाडा का सबसे करीबी आर्थिक और सुरक्षा साझेदार रहा है।

पिछले एक साल के दौरान दोनों पड़ोसी देशों के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ा है। ट्रंप ने कनाडा के उत्पादों पर ज्यादा टैरिफ लगाए हैं, जबकि कनाडा ने भी जवाब में अमेरिका के खिलाफ कदम उठाए हैं।

कार्नी का कहना है कि इस विवाद ने दिखा दिया है कि एक ही बाजार पर जरूरत से ज्यादा निर्भर रहना कनाडा के लिए जोखिम भरा हो सकता है।

इस महीने की शुरुआत में एक वीडियो संदेश में कार्नी ने कहा, “पिछले 40 साल अमेरिका के साथ हमारे आर्थिक रिश्तों को और गहरा करने का दौर रहा है। सच तो यह है कि इससे कारोबार करना आसान था, लेकिन इसका मतलब यह भी था कि हम एक ही आर्थिक साझेदार पर जरूरत से ज्यादा निर्भर हो गए। अब साफ है कि वह दौर खत्म हो चुका है।”

उन्होंने कहा, “इसीलिए जब से मैं सत्ता में आया हूं, हमारी योजना विकास और अलग-अलग देशों के साथ आर्थिक रिश्ते बढ़ाने की रही है। हम इस सच्चाई से इनकार करके पुराने अच्छे दिनों के लौटने का इंतजार नहीं करना चाहते और न ही पहले जैसी निर्भरता जारी रखना चाहते हैं।”

इसी रणनीति के तहत कनाडा ने अमेरिका के बाहर दूसरे देशों और क्षेत्रों के साथ अपने व्यापारिक रिश्ते बढ़ाने की कोशिश शुरू की है।

ऐसी रिपोर्टें भी आई हैं कि कनाडा यूरोपीय संघ (ईयू) का एसोसिएट सदस्य बन सकता है। इस संभावना पर ट्रंप ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।

इस बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा, “मुझे लगता है कि यह हास्यास्पद है।”

उन्होंने कहा क‍ि अगर वे ऐसा करते हैं और मुझे लगता है कि यह किसी तरह का विरोधी कदम है, तो मैं बहुत कड़े टैरिफ लगाऊंगा या कई चीजों पर यूरोप के साथ व्यापार रोक दूंगा।

ट्रंप ने कहा कि उनकी प्रतिक्रिया इस बात पर निर्भर करेगी कि कनाडा की ओर से ऐसा कदम अमेरिका के खिलाफ गलत इरादे से उठाया गया है या नहीं।

उन्होंने कहा क‍ि अगर यूरोप गलत इरादे से ऐसा करता है, तो हम यूरोप पर बहुत भारी टैरिफ लगाएंगे। अगर इरादा अच्छा है, तो कोई समस्या नहीं है।

इन बयानों से साफ होता है कि अमेरिका और कनाडा के बीच शुरू हुआ टैरिफ विवाद अब कनाडा की संप्रभुता और उसकी भविष्य की रणनीतिक साझेदारियों से जुड़ी बड़ी बहस में बदल गया है।

कार्नी ने इस सुझाव को खारिज किया है कि कनाडा अमेरिका का हिस्सा बन सकता है। इसके बजाय वह अमेरिका के साथ व्यापार में आगे किसी तरह की परेशानी से बचने के लिए कनाडा के आर्थिक संबंधों को अलग-अलग देशों और बाजारों तक फैलाने पर जोर दे रहे हैं।

Exit mobile version