आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा की सीबीआई कोर्ट ने शुक्रवार को लगभग दो दशक पुराने रिश्वतखोरी के एक मामले में एक पूर्व रेलवे अधिकारी को एक साल की कैद की सजा सुनाई। कोर्ट ने पश्चिम गोदावरी जिले के भीमावरम में दक्षिण मध्य रेलवे में सहायक मंडल अभियंता के रूप में कार्यरत मट्टा धर्म राव को एक ठेकेदार से रिश्वत मांगने और स्वीकार करने का दोषी ठहराया।
सीबीआई के अनुसार एक रेलवे ठेकेदार की शिकायत के बाद 29 नवंबर 2006 को मामला दर्ज किया गया था। जांचकर्ताओं ने पाया कि धर्म राव ने अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग करते हुए एक डिजिटल कैमरा, चार्जर और बैटरी रिश्वत के रूप में मांगी थी।
यह रिश्वत कथित तौर पर 1.87 लाख रुपए के बिल को पास करने के इनाम के रूप में और 77 हजार रुपए के एक अतिरिक्त लंबित बिल को पास करने के लिए प्रलोभन के रूप में ली गई थी। सीबीआई ने अपनी जांच पूरी करने के बाद 11 जून, 2007 को राव के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। उन्हें लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने दोषी पाया और एक साल की कैद और 1,500 रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई।
वहीं, गाजियाबाद सीबीआई कोर्ट ने गुरुवार को रिश्वतखोरी के एक मामले में खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के एक अधिकारी को चार साल की कैद और 50 हजार रुपए का जुर्माना और एक अन्य व्यक्ति को तीन साल की कैद और 10 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई।
आरोपियों के नाम बिनोद कुमार (सहायक, मेरठ खादी और ग्रामोद्योग आयोग) और सुरेंद्र उर्फ सनी खुराना हैं।
सीबीआई के अनुसार उसने 15 सितंबर, 2017 को आरोपी बिनोद कुमार और सुरेंद्र के खिलाफ रिश्वत मांगने और स्वीकार करने के आरोप में मामला दर्ज किया था।
खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग में सहायक एवं जिला समन्वयक के पद पर रहते हुए आरोपी बिनोद कुमार और सुरेंद्र ने एक सीमेंट टाइल निर्माण इकाई के लिए अमान्य ऋण आवेदन को संसाधित करने के लिए 1,25,000 रुपए की रिश्वत लेने की साजिश रची।

