18 फरवरी । शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि पूर्व डिप्टी सीएम अजित पवार के निधन के मामले में सीबीआई जांच से लोगों के मन में उठ रहे सवालों का जवाब मिल सकेगा। सांसद ने ये बात महाराष्ट्र की डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार ने द्वारा अपने पति अजित पवार की मौत मामले की सीबीआई जांच की मांग उठाने के बाद कही।
नई दिल्ली में आईएएनएस से बातचीत में शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि सुनेत्रा पवार महाराष्ट्र की डिप्टी सीएम हैं और इस दुखद घटना ने उनके परिवार पर असर डाला है। उनके पति महाराष्ट्र के एक जाने-माने नेता थे। उनके परिवार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की थी कि एयरक्राफ्ट कैसा था, ब्लैक बॉक्स कैसा था और उसकी हालत इतनी खराब है कि उसे विदेश भेजने की जरूरत पड़ सकती है। इन सब वजहों से सुनेत्रा पवार ने यह मांग की और सरकार ने इसे मान लिया है। इस सीबीआई जांच से जनता के बहुत सारे सवालों के जवाब मिलेंगे।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के चुनाव आयोग पर दिए बयान पर प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि चुनाव आयोग में जो ट्रांसपेरेंसी और आजादी होनी चाहिए, वह नहीं है। चुनाव आयोग में जो भी काम हो रहा है, वह सरकार की उम्मीदों या चाहतों के हिसाब से है। आयोग का निष्पक्ष रहना जरूरी है, लेकिन जनता चुनाव प्रक्रिया और अपने वोटिंग अधिकारों को लेकर कई सवाल उठा रही है। कहीं न कहीं एक तुगलकी माहौल है।
यूजीसी को लेकर प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि सबसे पहले मैं यह कहना चाहूंगी कि यूजीसी गाइडलाइंस को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया है, जिसमें स्टे लगा दिया गया है। स्टे इस आधार पर दिया गया था कि गाइडलाइंस नेचुरल जस्टिस के खिलाफ जा रही थीं। भेदभाव को दूर करने के लिए और ज्यादा भेदभाव विश्वविद्यालयों में ला रहे थे, जो दुर्भाग्यपूर्ण और आने वाली पीढ़ी के लिए खतरनाक था।
एआई समिट को लेकर प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि एआई समिट इनोवेशन, नए आइडिया खोजने और लर्निंग मॉडल डेवलप करने से जुड़े आपके काम पर फोकस करता है, लेकिन अगर कोई किसी दूसरे इंसान के इन्वेंशन का क्रेडिट लेने या उस पर दावा करने की कोशिश करता है तो यह सरासर प्लेगरिज्म है और यह देश के लिए सही नहीं है। जब इतना बड़ा समिट हो रहा हो, जिसमें इतने बड़े और इंटरनेशनल लोग शामिल हो रहे हों, तो कोई यह दावा नहीं कर सकता कि यह हमारा क्रिएशन है और सिर्फ चीनी हैंडलर्स इसे एक्सपोज कर दें, यह मंजूर नहीं है। मुझे लगता है कि गलगोटिया यूनिवर्सिटी को माफी मांगनी चाहिए।


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