N1Live National चंडीगढ़: इलेवन पावर कंपनी को लाइसेंस देने का विरोध, फेडरेशन ने सरकार को घेरा
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चंडीगढ़: इलेवन पावर कंपनी को लाइसेंस देने का विरोध, फेडरेशन ने सरकार को घेरा

ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने हरियाणा सरकार की पावर लाइसेंसिंग और निजीकरण नीति का विरोध करते हुए इसे जनहित के खिलाफ बताया है। उन्होंने गुरुग्राम में बिजली वितरण का लाइसेंस निजी कंपनी को दिए जाने पर सवाल उठाए और आशंका जताई कि इससे सरकारी बिजली वितरण निगम की आर्थिक स्थिति और खराब हो सकती है। उन्होंने सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग की। दुबे ने बताया कि नीति के विरोध में बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों की तीन दिवसीय हड़ताल जारी है।

शैलेंद्र दुबे ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि इलेवन पावर कंपनी की कुल पूंजी एक करोड़ रुपए है और कंपनी के पास बिजली क्षेत्र में एक दिन का भी काम करने का अनुभव नहीं है। इसके बावजूद उसे गुरुग्राम जैसे महत्वपूर्ण शहर में बिजली वितरण का लाइसेंस दिया गया है। समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस की ऐसी व्यवस्था देश में कहीं और नहीं है। महाराष्ट्र और गुजरात जैसे औद्योगिक राज्यों का उदाहरण देते हुए उन्होंने सवाल किया कि हरियाणा में इस व्यवस्था को लागू करने की क्या जरूरत है।

उन्होंने कहा कि बिजली उपभोक्ताओं में सब्सिडी पाने वाले और बिना सब्सिडी वाले, दो प्रकार के उपभोक्ता होते हैं। सब्सिडी वाले उपभोक्ताओं को लागत से कम कीमत पर बिजली उपलब्ध कराई जाती है। सरकारी कंपनियां जनहित में ऐसा करती हैं, लेकिन निजी कंपनियों से घाटे में बिजली आपूर्ति करने की उम्मीद नहीं की जा सकती। दुबे ने आशंका जताई कि निजी कंपनी गुरुग्राम में मुख्य रूप से वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं को बिजली देना पसंद करेगी, क्योंकि इन क्षेत्रों से उसे मुनाफा मिल सकता है। यदि ऐसा होता है, तो दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम पर आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है।

उन्होंने चेतावनी दी कि निजीकरण के बाद शुरुआत में कम दरों पर बिजली उपलब्ध कराई जा सकती है, लेकिन आगे चलकर टैरिफ बढ़ने का खतरा भी रहेगा। बिजली वितरण का पूरा बुनियादी ढांचा निजी कंपनी को सौंपे जाने की आशंका है। उन्होंने इस स्थिति की तुलना बीएसएनएल के अनुभव से करते हुए कहा कि बिजली क्षेत्र में भी वैसी परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि नियामक आयोग को नीतिगत निर्देश देकर संबंधित लाइसेंस निरस्त कराया जाए। बिजली अधिनियम के तहत सरकार के पास ऐसा करने की शक्ति है।

शैलेंद्र दुबे ने बताया कि बिजली कर्मचारियों की तीन दिन की हड़ताल चल रही है और उस दिन हड़ताल का दूसरा दिन था। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों ने पहले दशहरा, दीपावली और गुरु नानक देव जी की जयंती के बाद एक दिसंबर से हड़ताल का नोटिस दिया था। इसके बावजूद सरकार ने दशहरा से एक दिन पहले हड़ताल की स्थिति पैदा कर दी। सरकार के रवैये पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की मांगों पर संवेदनशीलता दिखाई जानी चाहिए थी। उन्होंने दावा किया कि देशभर के बिजली कर्मचारी और इंजीनियर हरियाणा के कर्मचारियों के साथ खड़े हैं।

उन्होंने बताया कि उत्तर भारत के आठ राज्यों के कर्मचारियों और इंजीनियरों के संयुक्त मोर्चे ने हरियाणा के मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर हड़ताल का समर्थन किया है। इन राज्यों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनके यहां से किसी कर्मचारी की ड्यूटी हरियाणा में हड़ताल के दौरान लगाई जाती है, तो वे कर्मचारी वहां काम करने नहीं जाएंगे। दुबे ने आगे कहा कि बिजली क्षेत्र के कर्मचारियों और इंजीनियरों की मुख्य मांग निजी कंपनी को दिया गया लाइसेंस रद्द करना है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह जनहित और बिजली वितरण व्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को ध्यान में रखते हुए अपनी नीति पर पुनर्विचार करे।

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