उत्तर प्रदेश में हवाई संपर्क बढ़ाने के दावों के बीच कांग्रेस ने सरकार की विकास नीति पर सवाल उठाए हैं। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने आरोप लगाया कि सरकार विकास परियोजनाओं को प्रभावी ढंग से संचालित करने के बजाय नाम बदलने और उद्घाटन के प्रचार में अधिक रुचि दिखा रही है।
उन्होंने जेवर एयरपोर्ट का नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर रखने की घोषणा के साथ ही प्रदेश के कई हवाई अड्डों पर नियमित उड़ान सेवाओं की स्थिति पर सवाल उठाते हुए सरकार से सार्वजनिक धन के इस्तेमाल का हिसाब मांगा। आराधना मिश्रा ने कहा कि लोग काम करके नाम कमाते हैं, लेकिन भाजपा सरकार नाम बदलकर काम चलाने में विश्वास रखती है। उनके मुताबिक, सरकार की प्राथमिकता योजनाओं को पूरा करना और उनका लाभ जनता तक पहुंचाना होना चाहिए, न कि नाम बदलकर सुर्खियां बटोरना। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार पर ‘आगे पाट, पीछे सपाट’ की कहावत चरितार्थ हो रही है। पहले योजना का उद्घाटन होता है, फिर प्रचार किया जाता है और उसके बाद उसके संचालन की स्थिति पर सवाल उठने लगते हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि दिसंबर 2020 में सरकार ने जेवर स्थित हवाई अड्डे का नाम ‘नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ तय किया था। अब इसका नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर रखने की घोषणा की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास कार्यों के वास्तविक परिणामों पर उठ रहे सवालों से ध्यान हटाने के लिए नामकरण की राजनीति की जा रही है। उन्होंने कहा कि जेवर एयरपोर्ट के लिए किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई और परियोजना में सार्वजनिक धन लगाया गया। उनके अनुसार, पहले और दूसरे चरण में लगभग 2,699 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित किए जाने का दावा है, जिससे 15 हजार से अधिक किसान प्रभावित हुए। तीसरे चरण सहित परियोजना के लिए प्रस्तावित कुल भूमि लगभग 6,200 हेक्टेयर बताई गई है।
आराधना मिश्रा ने कहा कि सरकार को एयरपोर्ट के नाम से ज्यादा उसकी सुविधाओं, कनेक्टिविटी और नियमित उड़ानों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि जून-जुलाई 2026 के दौरान नोएडा से नवी मुंबई और बेंगलुरु के लिए अकासा एयर की उड़ानें बंद हुईं। नोएडा-चंडीगढ़ मार्ग पर इंडिगो की उड़ान बंद होने और एयर इंडिया एक्सप्रेस की ओर से उड़ान शुरू करने की योजना टाले जाने की बात भी सामने आई है। उन्होंने कमजोर सड़क और रेल संपर्क, महंगी टैक्सी सेवाओं, सीधी मेट्रो की कमी तथा एयरपोर्ट शुल्क जैसी समस्याओं का उल्लेख करते हुए पूछा कि यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि हवाई संपर्क बढ़ाने के नाम पर छोटे शहरों में भी हवाई अड्डों का उद्घाटन किया गया, लेकिन कई स्थानों पर नियमित उड़ानों का संचालन शुरू नहीं हो सका या सेवाएं बंद होने की बात सामने आई है। उन्होंने कुशीनगर, आजमगढ़, अलीगढ़, चित्रकूट, श्रावस्ती, मुरादाबाद और सरसावा (सहारनपुर) के हवाई अड्डों का उल्लेख करते हुए इनकी परिचालन स्थिति पर सवाल उठाए।
उनके अनुसार, कुशीनगर में नवंबर 2023 से, आजमगढ़ में नवंबर 2024 से और चित्रकूट में दिसंबर 2024 से उड़ानें बंद होने की जानकारी सामने आई है। मुरादाबाद में भी उड़ान सेवाएं शुरू होने के कुछ समय बाद बंद होने की बात कही गई है। वहीं, अलीगढ़, श्रावस्ती और सरसावा में नियमित उड़ान सेवाओं को लेकर स्थिति स्पष्ट किए जाने की जरूरत है।
आराधना मिश्रा ने कहा कि इन परियोजनाओं पर हुए खर्च और उनके वास्तविक उपयोग के बारे में सरकार को सार्वजनिक रूप से जानकारी देनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि इन हवाई अड्डों पर 1,500 से 2,000 करोड़ रुपये तक खर्च किए जाने की बात कही जा रही है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक धन से तैयार बुनियादी ढांचे का उपयोग सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। केवल उद्घाटन कर देना विकास नहीं है, बल्कि जनता को उसका वास्तविक लाभ मिलना चाहिए। सरकार को नाम बदलने के बजाय हवाई अड्डों के संचालन, कनेक्टिविटी और नियमित उड़ान सेवाओं को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए।

