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एक फिल्म ने बदला चतुर रामलिंगम का करियर, टूटी-फूटी हिंदी की वजह से मिला पहला रोल

Chatur Ramalingam's career changed with one film; his broken Hindi led to his first role.

हिंदी सिनेमा में नाम तभी कमाया जा सकता है, जब फिल्म में लीड रोल करने का मौका मिले क्योंकि लीड रोल ही किसी अभिनेता की पहचान है। हालांकि, चतुर रामलिंगम के साथ ऐसा नहीं हुआ, बल्कि तीन बड़े स्टार्स को बीट कर उन्होंने अपनी दूसरी फिल्म से अपार सफलता पाई। हम बात कर रहे हैं थ्री इडियट्स के ओमी वैद्य की, जिन्होंने चतुर रामलिंगम उर्फ साइलेंसर का किरदार निभाया था।

10 जनवरी को लॉस एंजेलिस में जन्मे ओमी वैद्य की परवरिश वहीं हुई थी, लेकिन वे बीच-बीच में भारत आते रहते थे। उनके पिता और भाई दोनों ही डॉक्टर थे और वे चाहते थे कि ओमी भी डॉक्टर बने, लेकिन ओमी की आंखों में एक्टिंग की चमक दौड़ रही थी और अपने एक्टिंग को निखारने के लिए उन्होंने अमेरिका में थिएटर ज्वाइन किया और वे जब भी भारत आते थे, तो मराठी थिएटर में कुछ दिन जरूर बिताते थे।

ओमी हमेशा हॉलीवुड में अपनी किस्मत आजमाना चाहते थे और उन्हें छोटे-मोटे रोल मिलने लगे, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। ओमी को नहीं पता था कि एक मेगा फिल्म उनकी किस्मत को बदलने का इंतजार कर रही है। शादी में आए ओमी ने अपने दोस्त के कहने पर फिल्म ‘थ्री इडियट्स’ के लिए ऑडिशन दिया था, लेकिन क्या आप जानते हैं कि पहले अभिनेता को राजू रस्तोगी का रोल ऑफर किया गया था, लेकिन उनकी टूटी-फूटी हिंदी ने सारा खेल बिगाड़ दिया।

ऑडिशन के दिन उन्हें राजू रस्तोगी की लाइनें पढ़ने के लिए कहा गया था, लेकिन उनके लिए शुद्ध हिंदी बोल पाना मुश्किल हो रहा था। अभिनेता को लगने लगा कि उनका पत्ता साफ है, लेकिन कुछ दिनों बाद उन्हें फिल्म के डायरेक्टर राजू हिरानी ने दोबारा बुलाया और ‘लगे रहो मुन्ना भाई’ की स्क्रिप्ट पढ़ने को दी।

अभिनेता ने खुद इस बात का खुलासा इंटरव्यू में किया था कि संजय दत्त की लाइन इंसाफ और देश पर थी, लेकिन मैंने सब कुछ गलत पढ़ा और वहां बैठे सारे लोग हंसने लगे। राजू ने मेरी हिंदी की वजह से ही मुझे रोल ऑफर किया था, क्योंकि उन्हें ऐसे शख्स की तलाश थी, जिसे हिंदी बोलनी नहीं आती हो, लेकिन एक्टिंग आती हो।

उन्होंने ये भी बताया कि उन्हें बार-बार निर्देश दिए गए कि वे हिंदी न सीखें और फिल्म की स्क्रिप्ट भी शूटिंग शुरू होने से तीन दिन पहले मिली थी।

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