चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर द्वारा अपने सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय के माध्यम से अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (एआईसीआरपी) – कृषि में महिलाएं – के अंतर्गत आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का बुधवार को समापन हुआ। इस कार्यक्रम का उद्देश्य परियोजना के अंतर्गत भाद्यादा (चौंतरा ब्लॉक), बुहाना (पंचरुखी ब्लॉक) और तांबर (लंबागांव ब्लॉक) में स्थापित कस्टम हायरिंग केंद्रों से जुड़ी 25 महिला किसानों के कौशल और उद्यमशीलता क्षमताओं को बढ़ाना था।
यह प्रशिक्षण महाविद्यालय के विशेष विभागों के माध्यम से आयोजित किया गया, जहाँ प्रतिभागियों को मौसमी फलों और सब्जियों के मूल्यवर्धन, बेकरी उत्पादों की तैयारी, मोमबत्ती बनाने और कुशन कवर बनाने का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ। व्यावहारिक सत्रों का उद्देश्य कृषि क्षेत्र की महिलाओं को ऐसे कौशल विकसित करने में मदद करना था जिन्हें वे आय सृजित करने वाली गतिविधियों में परिवर्तित कर सकें।
इस कार्यक्रम में उद्यम स्थापना, विपणन रणनीतियों और जीवन कौशल प्रबंधन पर व्याख्यान और संवादात्मक सत्र भी शामिल थे। प्रतिभागियों को उद्यम विकसित करने, उनकी गतिविधियों का प्रभावी प्रबंधन करने और सफल आय सृजन के लिए उपयुक्त विपणन रणनीतियों को अपनाने के बारे में मार्गदर्शन दिया गया।
सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय की डीन डॉ. चंदरकांता वत्स ने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त कौशल और ज्ञान का प्रभावी उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कृषि क्षेत्र में महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण और उत्थान को बढ़ावा देने में इस प्रकार की पहलों के महत्व पर बल दिया।
डॉ. वत्स ने कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए आयोजकों डॉ. नीना व्यास, डॉ. राज पठानिया, डॉ. सपना गौतम और डॉ. बिंदिया दत्त को भी बधाई दी

