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ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में केमिस्टों की हड़ताल का दिखा मिला-जुला असर, ग्राहक बोले- ऑनलाइन विकल्प अधिक फायदेमंद

Chemists' strike against online drug sales has had mixed results, with customers saying online options are more profitable.

ऑनलाइन दवाओं की बिक्री पर प्रतिबंध की मांग को लेकर फार्मासिस्टों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का अलग-अलग हिस्सों में मिला-जुला असर दिखाई दिया है। अधिकतर केमिस्टों ने अपनी दुकानों को बंद रखा है, लेकिन कुछ जगह दुकानें खुली हैं। इसके साथ ही, ग्राहक ऑनलाइन दवा बिक्री को समर्थन दे रहे हैं।

अखिल भारतीय रसायनज्ञ और औषधि विक्रेता संगठन (एआईओसीडी) ने राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। इसके चलते तमिलनाडु, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में अधिकतर दुकानें बंद रहीं। तमिलनाडु के विलुप्पुरम जिले में 1,100 मेडिकल दुकानें बंद रहीं। इसी तरह, राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में केमिस्टों ने एक दिन की हड़ताल रखी, जिससे लगभग 850 थोक और खुदरा दुकानें प्रभावित हुईं।

हालांकि, दिल्ली के कुछ इलाकों में दुकानें खुली रहीं। एक केमिस्ट ने कहा, “हमारी दुकान अस्पताल के बाहर है। हमें बताया गया कि मरीजों को परेशानी हो रही है। इसलिए हमने अपनी मेडिकल की दुकान खोल कर रखी है।” उन्होंने ऑनलाइन दवा बिक्री का भी विरोध किया।

एक अन्य केमिस्ट ने कहा, “अस्पताल के बाहर दुकान होने के कारण हमें अपनी शॉप खोलनी पड़ी है। हमारी शॉप चौबीसों घंटे खुली रहती है, क्योंकि अस्पताल में दूर-दूर से मरीज आते हैं। अगर सभी दुकानें बंद हो जाती हैं, तो इससे मरीजों के लिए मुसीबत बढ़ जाएगी।”

इसी बीच, ग्राहक ऑनलाइन दवा बिक्री के समर्थन में नजर आए हैं। एक ग्राहक ने कहा, “ऑनलाइन दवा खरीद पर छूट मिलती है और समय पर दवा भी मिल जाती है। ऑनलाइन दवा मंगाने पर भी कोई चार्ज नहीं दिया जाता है। इसलिए वह काफी फायदेमंद है। आपात स्थिति में ऑफलाइन दवा ले सकते हैं। इसलिए दोनों ही ऑप्शन ग्राहकों के लिए अच्छे होते हैं।”

हालांकि, उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री कैलाश सिंह राजपूत ने ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में हो रही केमिस्टों की हड़ताल को गलत ठहराया। उन्होंने कहा, “मेडिकल वालों की हड़ताल बिल्कुल गलत है। ऑनलाइन दवाइयां मंगाने पर ग्राहकों को कम परेशानी होती है। ऑनलाइन दवाई सस्ती भी पड़ती है। इसलिए केमिस्ट हड़ताल करके गरीबों के साथ ही गलत कर रहे हैं।”

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