मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने रविवार को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के कल्याण के प्रति अपनी सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए पंजाब में नशीली दवाओं के खतरे से निपटने के लिए ठोस कार्रवाई का आह्वान किया।
नामदेव भवन में संत नामदेव की 756वीं जयंती के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सैनी ने कहा कि केंद्र और हरियाणा दोनों सरकारों ने पिछड़े समुदायों के लिए शिक्षा, रोजगार और आरक्षण के अवसरों का विस्तार करने के लिए कई कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा में पिछड़े वर्गों के लिए क्रीमी लेयर आय सीमा 6 लाख रुपये से बढ़ाकर 8 लाख रुपये कर दी गई है। राज्य ने स्थानीय निकायों में बीसी-ए श्रेणी के प्रतिनिधित्व को भी सुनिश्चित किया है और सरकारी नौकरियों में 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया है।
केंद्र द्वारा उठाए गए कदमों का जिक्र करते हुए सैनी ने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने और केंद्रीय विद्यालयों, नवोदय विद्यालयों, सैनिक विद्यालयों और चिकित्सा शिक्षा में ओबीसी आरक्षण का उल्लेख किया।
पंजाब में नशे की समस्या पर बोलते हुए सैनी ने राज्य सरकार की आलोचना की और कहा कि इस मुद्दे का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “इस समस्या से निपटने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए,” और इस बात पर जोर दिया कि युवाओं को नशे की लत से बचाना सरकार और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने पंजाब में बेरोजगारी, कानून व्यवस्था और युवाओं की स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की और कहा कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।

