पंजाब पुलिस के निलंबित डीआईजी एचएस भुल्लर से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में शिकायतकर्ता आकाश बट्टा की मुख्य परीक्षा गुरुवार को चंडीगढ़ में सीबीआई अदालत में शुरू हुई। पिछली सुनवाई की तारीख पर, चंडीगढ़ स्थित सीबीआई कोर्ट की विशेष न्यायाधीश भावना जैन ने भ्रष्टाचार मामले में बट्टा को अगले अभियोजन गवाह के रूप में तलब करने के लिए सीबीआई द्वारा दायर आवेदन को स्वीकार कर लिया था।
गुरुवार को सुनवाई के दौरान, शिकायतकर्ता ने कृषानु शारदा की पहचान की, जो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई में शामिल हुए क्योंकि वे ईडी की हिरासत में हैं। शिकायतकर्ता ने भुल्लर की भी पहचान की, जो अदालत में उपस्थित थे। इस मामले में एफआईआर बट्टा की शिकायत पर दर्ज की गई थी, जिन्होंने आरोप लगाया था कि भुल्लर, जो उस समय पंजाब पुलिस के रोपड़ रेंज में डीआईजी के पद पर तैनात थे, ने सरहिंद पुलिस स्टेशन में दर्ज एक एफआईआर में अनुकूल व्यवहार सुनिश्चित करने और शिकायतकर्ता के व्यवसाय के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न होने देने के लिए एक निजी मध्यस्थ, कृषानु शारदा के माध्यम से अवैध रिश्वत की मांग की थी।
शिकायत मिलने के बाद जाल बिछाया गया और भुल्लर के कथित सहयोगी, कृषानु शारदा को सबसे पहले 16 अक्टूबर, 2025 को शिकायतकर्ता से रिश्वत के तौर पर 5,00,000 रुपये लेते हुए पकड़ा गया। भुल्लर को भी उसी दिन गिरफ्तार कर लिया गया और बीएनएसएस की धारा 193 के तहत आरोप पत्र दायर किया गया।
मुख्य पूछताछ के दौरान, बट्टा ने कहा कि वह 2013 से पंजाब के फतेहगढ़ साहिब जिले के मंडी गोविंदगढ़ में कबाड़ के कारोबार का संचालन कर रहा था। फर्जी बिलों और दस्तावेजों के झूठे आरोपों पर सरहिंद पुलिस स्टेशन में उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। कृषानु पहले से ही पुलिस का परिचित था और वह यह जताने की कोशिश करता था कि वह कई अधिकारियों को जानता है। बट्टा ने कहा कि कृषानु को इस बात का एहसास था कि एफआईआर दर्ज होने के कारण वह तनाव में था।

