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जम्मू-कश्मीर के शोपियां में सीआरपीएफ के एएसआई की मौत, कुलगाम में युवक का शव मिला

CRPF ASI killed in Shopian, Jammu and Kashmir, youth's body found in Kulgam

जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले में शुक्रवार को एक कैंप के अंदर सीआरपीएफ के एक जूनियर अधिकारी की मौत हो गई। वहीं, कुलगाम जिले में एक युवक का शव बरामद किया गया। पुलिस ने बताया कि शोपियां जिले के जैनापोरा इलाके में स्थित हॉर्टिकल्चर कैंप में तैनात एएसआई अचानक गिर पड़े। उन्हें तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) जैनापोरा ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

पुलिस ने बताया, “एएसआई कठुआ जिले के राजबाग इलाके का रहने वाला था। मामले का संज्ञान लेकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।” एक अन्य घटना में कुलगाम जिले के चिम्मर इलाके में 25 वर्षीय युवक अपने घर में मृत पाया गया। वह पेशे से मैकेनिक था। वह घर के अंदर फंदे से लटका हुआ मिला।

एक पुलिस अधिकारी ने बताया, “मेडिको-लीगल औपचारिकताएं और पोस्टमार्टम पूरा होने के बाद शव परिवार को अंतिम संस्कार के लिए सौंप दिया गया। पुलिस ने मामले का संज्ञान लेकर आगे की जांच शुरू कर दी है।” कश्मीर में युवाओं द्वारा आत्महत्या के बढ़ते मामले चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। इस क्षेत्र में 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के लोगों की मौत का चौथा सबसे बड़ा कारण आत्महत्या बन चुकी है।

सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, कश्मीर घाटी में आत्महत्या के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2020 में ऐसे 472 मामले दर्ज किए गए थे, जो 2021 में बढ़कर 586 हो गए। यह स्थिति सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक कारणों के जटिल असर का परिणाम मानी जा रही है। इसमें नशे की लत और नशीले पदार्थों का बढ़ता इस्तेमाल भी एक बड़ा कारण है। अनुमान के अनुसार, करीब 4.6 प्रतिशत आबादी नशीले पदार्थों का सेवन करती है।

नशीले पदार्थों का सेवन करने वाले लगभग दो-तिहाई लोगों ने इसकी शुरुआत कम उम्र में ही कर दी थी, आमतौर पर 11 से 20 साल की उम्र के बीच। लंबे समय तक हिंसा और सामाजिक-राजनीतिक अशांति का असर लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ा है। अनुमान के अनुसार, करीब 45 प्रतिशत वयस्क आबादी किसी न किसी मानसिक परेशानी से जूझ रही है। इनमें डिप्रेशन के 41 प्रतिशत, एंग्जायटी के 26 प्रतिशत और पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (पीटीएसडी) के 19 प्रतिशत मामले शामिल हैं।

उच्च बेरोजगारी, आर्थिक दबाव और पढ़ाई व नौकरी के अवसरों के लिए बढ़ती कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण युवाओं में निराशा बढ़ रही है। टूटते सपने और भविष्य को लेकर चिंता भी इसके बड़े कारणों में शामिल हैं। नशे और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सामाजिक डर और बदनामी की भावना के कारण कई लोग मदद लेने से बचते हैं। इसके अलावा, स्थानीय रिपोर्टों में पारिवारिक समस्याओं और प्रेम संबंधों में असफलता को भी आत्महत्या के प्रमुख कारणों में गिना जाता है।

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