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सुरक्षा जब्ती के बाद कस्टम्स ने 35 किरपान लौटाए; हवाईअड्डा सुरक्षा प्रक्रियाओं पर बहस फिर तेज

Customs returns 35 kirpans after security seizure; debate reignites over airport security procedures

अनिल भारद्वाज

चंडीगढ़, 13 फरवरी 2026 – सिख संगठनों द्वारा स्वागत किए गए लेकिन लंबे समय से उठ रही शिकायतों को भी उजागर करने वाले एक घटनाक्रम में मुंबई हवाईअड्डे के कस्टम्स अधिकारियों ने जब्त किए गए 35 ‘किरपान’ उनके ‘गात्रों’ सहित सिख समुदाय के प्रतिनिधियों को बुधवार को लौटा दिए। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब विभिन्न सिख संस्थाएं और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी लगातार यह मुद्दे उठाती रही हैं कि भारतीय हवाईअड्डों की सुरक्षा प्रक्रियाएं कई बार संविधान द्वारा संरक्षित धार्मिक स्वतंत्रताओं से टकराती हैं।

ये धार्मिक वस्तुएं अमृतधारी सिख यात्रियों से सुरक्षा जांच के दौरान इसलिए कब्ज़े में ले ली गई थीं क्योंकि उनके छोटे किरपान निर्धारित विमानन आकार या वहन मानकों के अनुरूप नहीं थे। किरपान, जिसे अमृतधारी सिख अपने पांच ककारों में से एक के रूप में धारण करते हैं, गहन आध्यात्मिक महत्व रखता है और धार्मिक पहचान से अभिन्न माना जाता है।

महाराष्ट्र स्थित ‘सत श्री अकाल वेलफेयर ट्रस्ट’ के सचिव सरदार पूरन सिंह बंगा ने कहा कि इन पवित्र वस्तुओं की वापसी का प्रयास उनकी गरिमा की रक्षा की भावना से प्रेरित था। उन्होंने कहा कि जब किसी किरपान को जब्त किया जाता है तो सिख अनुयायी उसे सामान्य वस्तु नहीं बल्कि आस्था के प्रतीक के रूप में देखते हैं जिसके साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार होना चाहिए। उनके अनुसार सुरक्षा जांच के दौरान कई बार सिख यात्री अनजाने में किरपान वहीं छोड़ देते हैं जिसके बाद अनेक वस्तुएं आधिकारिक अभिरक्षा में बिना दावे के पड़ी रहती हैं।

ट्रस्ट ने हवाईअड्डों पर वर्तमान में रखी धार्मिक वस्तुओं की पहचान के लिए कस्टम्स अधिकारियों से समन्वय शुरू कर दिया है। सत्यापन के बाद ऐसी वस्तुएं ट्रस्ट या स्थानीय गुरुद्वारा प्रबंधक समितियों को सौंप दी जाएंगी। उन्होंने बताया कि जहां संभव होगा, उन्हें संबंधित परिवारों को लौटाया जाएगा अन्यथा सिख धार्मिक परंपरा के अनुसार सम्मानपूर्वक विसर्जित किया जाएगा और सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी।

सरदार पूरन सिंह ने यह भी कहा कि कस्टम्स अधिकारियों ने बताया है कि हाल में अन्य धर्मों से संबंधित वस्तुओं के साथ भी इसी प्रकार की प्रक्रिया अपनाई गई है। कुरान और बाइबिल की प्रतियां तथा ‘जमजम’ पानी की बोतलें भी यात्रियों या समुदाय प्रतिनिधियों को लौटाई गई हैं।

इस कदम के बावजूद सिख संगठन हवाईअड्डों की सुरक्षा प्रक्रियाओं को लेकर चिंता जताते रहे हैं। उनका कहना है कि कभी-कभी यात्रियों को शारीरिक जांच के दौरान ‘कड़ा’, जो आस्था का अनिवार्य प्रतीक है, उतारने के लिए कहा जाता है। सिख चिंतक एडवोकेट हरजीत सिंह ग्रेवाल ने कहा कि विमानन सुरक्षा नियमों और संविधान द्वारा प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाने के लिए सभी हवाईअड्डों पर स्पष्ट दिशानिर्देश और सुरक्षा कर्मियों की बेहतर संवेदनशीलता आवश्यक है। उन्होंने बताया कि कई बार अमृतधारी यात्रियों को हवाईअड्डों पर किरपान और खंडा हार साथ ले जाने से रोका गया है और सिखों ने ऐसे मामलों को केंद्र सरकार के समक्ष उठाया है। ऐसी प्रक्रियाएं भावनात्मक पीड़ा पहुंचाती हैं और सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं का उल्लंघन करती हैं।

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