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दामला कृषि विज्ञान केंद्र ने सतत कृषि के लिए कार्य योजना तैयार की

Damla Krishi Vigyan Kendra has prepared an action plan for sustainable agriculture.

चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार के कृषि सेवा केंद्र, दमला (यमुनानगर) स्थित कृषि विज्ञान केंद्र ने वैज्ञानिक सलाहकार समिति की 31वीं वार्षिक बैठक का आयोजन किया। बैठक की अध्यक्षता हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार के विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. नरेश कौशिक ने की।

बैठक का मुख्य उद्देश्य जिले की कृषि संबंधी जरूरतों के अनुरूप आने वाले वर्षों के लिए एक कार्य योजना तैयार करना, नई कृषि तकनीकों के प्रसार में तेजी लाना और किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्रभावी रणनीतियां तैयार करना था।

बैठक में कृषि विज्ञान केंद्र के समन्वयक डॉ. संदीप रावल ने 2025-26 के दौरान केंद्र द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों, अग्रिम पंक्ति के प्रदर्शनों, तकनीकी परामर्शों, महिला एवं युवा सशक्तिकरण गतिविधियों और किसान-हितैषी नवाचारों पर एक विस्तृत प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की।

2026-27 के लिए कार्य योजना साझा करते हुए, उन्होंने बताया कि केंद्र का विशेष ध्यान जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, जलवायु-अनुकूल कृषि, फसल विविधीकरण, प्राकृतिक और जैविक खेती और मूल्यवर्धन को मजबूत करने पर होगा।

अपने अध्यक्षीय भाषण में डॉ. नरेश कौशिक ने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्रों का उद्देश्य केवल प्रौद्योगिकी का प्रसार करना ही नहीं, बल्कि किसानों की वास्तविक समस्याओं का वैज्ञानिक समाधान प्रदान करना भी है। कौशिक ने कहा, “कृषि वैज्ञानिक, विभिन्न विभाग और किसान यदि समन्वय से काम करें, तो कृषि अधिक लाभदायक, टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल बन सकती है।”

उन्होंने किसानों से पारंपरिक धान-गेहूं फसल चक्र से आगे बढ़कर दालें, तिलहन, अनाज, बागवानी, सब्जी उत्पादन, औषधीय और सुगंधित पौधे, कृषि वानिकी, पशुपालन, मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन और दुग्ध उत्पादन जैसी एकीकृत कृषि प्रणालियों को अपनाने का आग्रह किया। कौशिक ने कहा, “इससे जोखिम कम होगा, आय बढ़ेगी और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण होगा।” उचानी (करनाल) स्थित क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र की क्षेत्रीय निदेशक डॉ. महा सिंह ने किसानों के हित में दमला स्थित कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की।

उन्होंने कहा कि यमुनानगर जिले में कृषि वानिकी और प्लाईवुड उद्योग की संभावनाओं को देखते हुए, वैज्ञानिकों को कृषि वानिकी आधारित मॉडल विकसित करने चाहिए ताकि किसान लकड़ी उत्पादन के साथ-साथ अन्य फसलों से भी नियमित आय अर्जित कर सकें। उन्होंने मौसम आधारित कृषि सलाह और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर अनुसंधान और विस्तार गतिविधियों को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।

इस कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. अनिल कुमार (वानिकी), डॉ. विशाल गोयल (मृदा विज्ञान), डॉ. आराधना बाली (कृषि विज्ञान), डॉ. अस्मा खान (गृह विज्ञान), तकनीकी सहायक डॉ. करण सिंह, जिला बागवानी अधिकारी, यमुनानगर, डॉ. दिलबाग लितानी और किसान क्लब के अध्यक्ष एसपी सिंह भी उपस्थित थे।

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