N1Live Entertainment ‘डांस अक्रॉस द वर्ल्ड’ दे रहा लोकनृत्य को नया मंच, रूस की परंपराएं से रुबरू कराएंगी शक्ति मोहन
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‘डांस अक्रॉस द वर्ल्ड’ दे रहा लोकनृत्य को नया मंच, रूस की परंपराएं से रुबरू कराएंगी शक्ति मोहन

'Dance Across the World' is giving a new platform to folk dance, Shakti Mohan will introduce you to the traditions of Russia.

23 फरवरी । आज के दौर में, जब ग्लोबलाइजेशन के नाम पर लोककलाएं और पारंपरिक नृत्य धीरे-धीरे हाशिए पर जाते दिख रहे हैं, ऐसे समय में कुछ कलाकार ऐसे भी हैं, जो इन्हें दुनिया के सामने नए अंदाज में पेश कर रहे हैं। इसी सोच और जुनून के साथ भारतीय डांस जगत की जानी-मानी कलाकार शक्ति मोहन अपने खास यूट्यूब प्रोजेक्ट ‘डांस अक्रॉस द वर्ल्ड’ के जरिए एक वैश्विक सांस्कृतिक सफर पर निकली हैं।

उनका यह सफर सिर्फ देशों की सीमाएं पार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अलग-अलग सभ्यताओं को समझने और उन्हें आज की युवा पीढ़ी से जोड़ने की कोशिश भी है।

हाल ही में शक्ति मोहन ने ‘डांस अक्रॉस द वर्ल्ड’ का नया एपिसोड लॉन्च किया, जिसमें वह रूस की समृद्ध और शक्तिशाली लोकनृत्य परंपराओं को एक्सप्लोर करती नजर आईं। इस खास एपिसोड की लॉन्चिंग में उनके करीबी दोस्त, परिवार और इंडस्ट्री से जुड़े कई लोग मौजूद रहे, जिन्होंने उनके इस विजन की खुलकर तारीफ की।

‘डांस अक्रॉस द वर्ल्ड’ को शक्ति मोहन ने ड्रीम प्रोजेक्ट बताया और कहा, “मैं इसके जरिए हजारों साल पुरानी लोकनृत्य शैलियों को आज की पीढ़ी तक पहुंचाना चाहती हूं। इस शो का पहला सीजन कई देशों की यात्रा पर आधारित रहा, जहां मैंने अलग-अलग संस्कृतियों के पारंपरिक नृत्यों को न सिर्फ सीखा, बल्कि उन्हें दर्शकों के सामने पेश भी किया।”

शक्ति मोहन ने कहा, “दुनिया में कई ऐसी नृत्य परंपराएं हैं, जो बेहद सुंदर होने के बावजूद धीरे-धीरे गुमनाम होती जा रही हैं। इन कला रूपों को बचाने के लिए जरूरी है कि उन्हें आज के युवाओं के सामने इस तरह पेश किया जाए, जिससे वे उनसे जुड़ाव महसूस करें। मेरे लिए यह शो दिल के बेहद करीब है। मैं खुद को खुशकिस्मत मानती हूं कि मुझे अपने दो सबसे बड़े प्यार, यानी ट्रैवल और डांस, को एक साथ जीने का मौका मिल रहा है।”

रूस के लोकनृत्य को शक्ति मोहन ने अपने करियर के सबसे अलग और चुनौतीपूर्ण अनुभवों में से एक बताया। उन्होंने कहा, “रूसी डांस अपनी तकनीक, गति और भाव-भंगिमा के मामले में बेहद अनोखा है। एक भारतीय डांसर के तौर पर मुझे यह बेहद खास लगा। मुझे भरतनाट्यम जैसी शास्त्रीय नृत्य शैली पसंद है, जिसमें पैरों की जटिल थाप और सटीक मुद्राओं का अहम रोल होता है, जबकि रूसी डांस की भाषा बिल्कुल अलग है। इसी वजह से इसे कम समय में सीखना और मंच पर उतारना मेरे लिए चुनौतीपूर्ण रहा।”

उन्होंने कहा, ”रूस में मुझे लोगों का अपनापन सबसे ज्यादा यादगार रहा। वहां की एक रूसी कोरियोग्राफर मेरी मेहनत और समर्पण से इतनी प्रभावित हुईं कि उन्होंने मुझे पारंपरिक हेडगियर गिफ्ट किया। यह तोहफा मेरे लिए दो संस्कृतियों के बीच बने सम्मान और जुड़ाव का प्रतीक है। भले ही भारतीय और रूसी डांस की शैलियां अलग हों, लेकिन उनमें खूबसूरत फ्यूजन की संभावनाएं मौजूद हैं।”

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