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देबीना बनर्जी ने मातृत्व पर कही दिल की बात, बोलीं-मातृत्व ने मुझे और मजबूत बनाया

अभिनेत्री देबीना बनर्जी आगामी फिल्म ‘तुम मेरे हो’ की रिलीज को लेकर तैयार हैं। अभिनेत्री ने अपने मातृत्व और करियर को लेकर बात करते हुए कहा कि एक महिला जब ठान लेती है तो वह कुछ भी कर सकती है, उसकी कोई सीमा नहीं होती।

उनका मानना है कि मातृत्व अपनी जगह है और काम अपनी जगह, दोनों को साथ लेकर चलना ही एक महिला की असली ताकत है। उन्होंने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “मातृत्व अपनी जगह है और हमारा काम अपनी जगह। जब एक महिला सोचती है कि वो बहुत कुछ कर सकती है, तो मां बनने के बाद उसे एहसास होता है कि वो सच में असीमित है। जब आप एक बच्चे को जन्म देती हैं, तब आपको समझ आता है कि आप एक नई जिंदगी बना सकती हैं। इससे बड़ी बात और क्या हो सकती है?”

आईएएनएस ने अभिनेत्री से सवाल करते हुए पूछा, “एक महिला प्रोड्यूसर के तौर पर, क्या आपको लगता है कि इंडस्ट्री में आपको चुनौतियों का सामना करना पड़ता है?” अभिनेत्री ने कहा, “मुझे लगता है कि यह बात सिर्फ हमारी इंडस्ट्री की ही नहीं बल्कि हर जगह महिलाओं को लोग कम गंभीरत से लेते हैं। लोगों को लगता है कि फैसले वही लेंगे लेकिन मुझे लगता है कि अब बदलाव हो रहा है। ये इस पर निर्भर करता है कि आप हालातों कैसे संभालते हैं। मैं यहां अकेली नहीं हूं, मेरे पति गुरमीत हमेशा मेरे साथ रहते हैं, इसलिए मुझे लगता है कि चुनौती कम है। हमारी दूसरी प्रोड्यूसर, रीवा क्रिएटिव्स, को भी एक महिला ही लीड करती हैं। मुझे लगता है कि हम बहुत मजबूत हैं। हम अपनी बात बहुत स्पष्ट रूप से रखते हैं। हमें जो चाहिए, वही चाहिए, और उसमें कोई समझौता नहीं होना चाहिए।”

अभिनेत्री से आगे आईएएनएस ने एक और सवाल करते पूछा, “जब एक बड़ी फिल्म के साथ एक छोटी फिल्म रिलीज होती है, तो क्या आपको लगता है कि छोटी फिल्मों को स्क्रीन और शोज मिलने में परेशानी होती है?”

देबीना बनर्जी ने कहा, “जब तक आप अपनी जमीन मजबूत नहीं करते और अपनी काबिलियत साबित नहीं करते, तब तक आप ज्यादा कुछ नहीं कर सकते हैं। आपको लोगों को बताना पड़ता है कि, “आपने मेरी एक-दो फिल्में देखी हैं। मुझे वो मौका दीजिए।” वरना बड़ी फिल्में बहुत सारे थिएटर ब्लॉक कर लेती हैं।

आपको बैठकर समझदारी से बात करनी पड़ती है और ये सुनिश्चित करना पड़ता है कि आपको थिएटर स्पेस मिले। दर्शकों की रुचि के हिसाब से शोज मिलने चाहिए और वो शोज अच्छे थिएटर्स में होने चाहिए जहां दर्शक आते हैं। बजट कम होने की वजह से आपको बहुत सी चीजों का ध्यान रखना पड़ता है लेकिन ये नामुमकिन नहीं है। जब आप मुकाबले में होते हैं, तो आपको मुकाबला करना ही पड़ता है।”

उन्होंने कहा, “आप बैठकर सिर्फ विरोध नहीं कर सकते। आपको एक-एक कदम आगे बढ़कर अपनी जगह बनानी पड़ती है। हमारी पहली फिल्म के समय कई जगह लोगों को मनाना मुश्किल था। हम उनसे कहते थे कि हमारे गाने सुनिए और सब कुछ देखिए। उसके बाद सारेगामा हमारे साथ जुड़ा।मुझे लगता है कि हमारी टीम में अच्छा तालमेल है। अगली बार अगर हम कहेंगे कि हम भारतीय सिंगर्स और कंपोजर्स के साथ जा रहे हैं, तो शायद हमारे गाने पहले ही बिक जाएं। इस बार हमें इसके लिए काफी मेहनत करनी पड़ी। धीरे-धीरे चीजें आसान हो जाएंगी लेकिन चीजें तभी आसान होंगी जब लोग जाकर फिल्म देखेंगे और उसे एक जगह देंगे।”

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