N1Live National वक्फ संशोधन विधेयक पर गहन अध्ययन के बाद लिया समर्थन का फैसला : बीजद
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वक्फ संशोधन विधेयक पर गहन अध्ययन के बाद लिया समर्थन का फैसला : बीजद

Decision to support Wakf Amendment Bill taken after thorough study: BJD

संसद के दोनों सदनों ने वक्फ संशोधन विधेयक पास कर दिया है। अब राष्ट्रपति की ओर से मंजूरी मिलने के बाद यह कानून बन जाएगा। संसद से विधेयक पास होने के बाद सियासी प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है। इसी कड़ी में बीजू जनता दल (बीजद) के उपाध्यक्ष देबी मिश्रा ने विधेयक के पक्ष में राज्यसभा में मतदान पर विस्तृत बयान जारी किया। उन्होंने इस मुद्दे पर पार्टी के दृष्टिकोण और निर्णय की प्रक्रिया के बारे में स्पष्ट जानकारी दी।

देबी मिश्रा ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि यह एक गहन विचार-विमर्श का मामला था। हमारे सांसदों को स्थिति का विश्लेषण करने की स्वतंत्रता दी गई थी। एक महीने पहले पार्टी ने इस विधेयक के विरोध का निर्णय लिया था। हालांकि, तब से कई घटनाएं हुई हैं, जिनसे नई चिंताएं और आशंकाएं उत्पन्न हुई हैं, खासकर उन धाराओं को लेकर जो अल्पसंख्यक संस्थाओं की शक्तियों को कमजोर कर सकती हैं।

उन्होंने कहा कि पार्टी हमेशा से अल्पसंख्यकों के वास्तविक अधिकारों की रक्षा के प्रति प्रतिबद्ध रही है। एक सच्ची लोकतांत्रिक व्यवस्था में, सभी समुदायों के सांस्कृतिक और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए, जिनमें अल्पसंख्यक समुदाय भी शामिल हैं। बीजद प्रमुख नवीन पटनायक इस सिद्धांत में दृढ़ विश्वास रखते हैं। सदन में चर्चाओं के दौरान कई प्रकार की उलझनें और चिंताएं उठीं, जिस कारण हमारे राज्यसभा सांसदों को इस बिल के प्रावधानों का अकादमिक और कानूनी रूप से गहन विश्लेषण करने की स्वतंत्रता दी गई थी। मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि उन्हें मुद्दे पर गहरे अध्ययन और सूचित निर्णय लेने की पूरी स्वतंत्रता दी गई थी।

उन्होंने कहा कि यह निर्णय न तो एनडीए या ‘इंडिया’ गठबंधन के पक्ष में है और न ही विपक्ष में। हम एक क्षेत्रीय पार्टी हैं और हमारी नीति हमेशा समान दूरी बनाए रखने की रही है। साथ ही, हम हमेशा अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।

देबी मिश्रा ने कहा कि वक्फ बोर्ड में कुछ व्यक्तियों द्वारा सत्ता के दुरुपयोग के बारे में चिंता हो सकती है, लेकिन अल्पसंख्यक संस्थाओं को कमजोर करने की बड़ी आशंका को संबोधित किया जाना चाहिए। इसी कारण हमारे सांसदों से इस बिल का गहन अध्ययन करने, स्वतंत्र रूप से विचार करने और अपने विचार व्यक्त करने का अनुरोध किया गया था।

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