दिल्ली में हाल ही में शुरू किए गए बारापुला फेज-3 कॉरिडोर पर यातायात जाम और धीमी रफ्तार को लेकर राजनीति तेज हो गई है। दिल्ली के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) मंत्री प्रवेश वर्मा ने बुधवार को इसके लिए पिछली आम आदमी पार्टी (आप) सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि परियोजना का डिजाइन और कई अहम फैसले आप सरकार के कार्यकाल में लिए गए थे। मौजूदा सरकार अब यातायात संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए तत्काल और दीर्घकालिक उपायों पर काम कर रही है।
पिछले महीने शुरू हुए बारापुला फेज-3 कॉरिडोर पर वाहनों की धीमी आवाजाही और जाम की स्थिति सामने आने के बाद दिल्ली यातायात पुलिस ने भी पीडब्ल्यूडी को पत्र लिखकर कई खामियों की ओर ध्यान दिलाया है। पुलिस ने यातायात प्रवाह बेहतर करने के लिए कॉरिडोर में कुछ बदलाव सुझाए हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रवेश वर्मा ने कहा कि सरकार ने उद्घाटन के अगले ही दिन से कॉरिडोर पर यातायात की स्थिति का संज्ञान लिया था। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर सवाल उठाए, लेकिन यह नहीं बताया कि कॉरिडोर का डिजाइन आप सरकार के कार्यकाल में ही मंजूर हुआ था।
उन्होंने कहा, “आम आदमी पार्टी झूठ को सच साबित करने में माहिर है। झूठ को सच के तौर पर पेश करने में उनका कोई मुकाबला नहीं है।”
वर्मा ने दावा किया कि बारापुला फेज-3 परियोजना 2015 में शुरू हुई थी और इसका डिजाइन 2014-15 में ही मंजूर कर लिया गया था। उस समय दिल्ली में आप की सरकार थी। उन्होंने कहा कि कॉरिडोर में कितनी लेन होंगी और डिजाइन से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण निर्णय भी उसी दौरान लिए गए थे।
पीडब्ल्यूडी मंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार के फरवरी 2025 में सत्ता में आने के बाद उन्होंने बारापुला फ्लाईओवर का निरीक्षण किया था। उस समय तक परियोजना का बड़ा हिस्सा पूरा हो चुका था। उन्होंने बताया कि फ्लाईओवर के लिए कुल 298 पिलर बनाए जाने थे, जिनमें से 288 पिलर यानी करीब 80 प्रतिशत काम भाजपा सरकार के सत्ता में आने से पहले ही पूरा हो चुका था।
परियोजना की लागत और भुगतान का जिक्र करते हुए वर्मा ने कहा कि 2014-15 में इसकी शुरुआती अनुमानित लागत 1,057 करोड़ रुपये थी। बाद में निर्माण कंपनी ने 964 करोड़ रुपये की निविदा पेश की। काम 28 अप्रैल 2015 को शुरू हुआ था और इसे 30 महीने में यानी 27 अक्टूबर 2017 तक पूरा किया जाना था, लेकिन परियोजना में करीब नौ साल की देरी हुई।
उन्होंने आरोप लगाया कि परियोजना में देरी के कारण सरकारी और करदाताओं के पैसे की बड़ी राशि खर्च हुई। मंत्री के मुताबिक, भाजपा सरकार के सत्ता में आने से पहले ठेकेदार को 36.66 करोड़ रुपये की पहली लागत वृद्धि और 39.85 करोड़ रुपये की दूसरी लागत वृद्धि का भुगतान किया गया। इसके बाद ठेकेदार ने अनुबंध में मौजूद मध्यस्थता प्रावधान के तहत मामला उठाया और 29 सितंबर 2021 को उसे 44 करोड़ रुपये का भुगतान किए जाने का दावा किया गया।
वर्मा ने बारापुला फेज-3 के दो लेन वाले डिजाइन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भविष्य में बढ़ने वाले यातायात को ध्यान में रखते हुए परियोजना की योजना बनाई जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि एक तरफ डीएनडी फ्लाईवे और दूसरी तरफ दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे अपेक्षाकृत अधिक चौड़े हैं, ऐसे में यमुना के ऊपर बने इस कॉरिडोर को दोनों तरफ केवल दो-दो लेन का बनाया जाना सवाल खड़े करता है।
उन्होंने कहा कि करीब 1,000 करोड़ रुपये के सार्वजनिक धन से बनने वाले ऐसे बुनियादी ढांचे की योजना अगले कई दशकों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई जानी चाहिए थी। इसके लिए यातायात और आबादी के भविष्य के अनुमान के आधार पर आकार और क्षमता तय की जाती है।
हालांकि, मंत्री ने कहा कि मौजूदा सरकार यातायात समस्या को दूर करने के लिए लगातार काम कर रही है। प्रस्तावित उपायों में नया यू-टर्न बनाना, एक अतिरिक्त लेन जोड़ने की संभावना तलाशना और प्रमुख मर्जिंग प्वाइंट में बदलाव शामिल हैं। यातायात की वास्तविक समय की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए गूगल के साथ भी चर्चा की जा रही है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली यातायात पुलिस और सलाहकारों की सिफारिशों पर काम शुरू हो चुका है और अगले 10 से 15 दिनों में यात्रियों को स्थिति में सुधार दिखाई दे सकता है।
यातायात पुलिस ने सुंदरियल पार्क के पास मर्जिंग प्वाइंट को नए सिरे से डिजाइन करने और गुरुद्वारा बाला साहिब के पास एक समर्पित यू-टर्न बनाने का सुझाव दिया है। पुलिस ने लेन की क्षमता और मर्जिंग प्वाइंट की बनावट में असंगति को भी जाम का एक प्रमुख कारण बताया है।
करीब 1,635 करोड़ रुपये की लागत से बना बारापुला फेज-3 फ्लाईओवर नोएडा लिंक रोड स्थित मयूर विहार फेज-1 को रिंग रोड स्थित सराय काले खां से जोड़ता है। यह मौजूदा बारापुला नेटवर्क से जुड़कर एम्स गोलचक्कर तक करीब 10 किलोमीटर लंबे सिग्नल-फ्री मार्ग का हिस्सा बनता है।

