दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री कपिल मिश्रा ने दिल्ली विधानसभा के स्पीकर विजेंद्र गुप्ता को एक पत्र लिखकर विधायी विशेषाधिकार के उल्लंघन का मामला उठाया है। उन्होंने संविधान के आर्टिकल 361 ए का हवाला देते हुए अनुरोध किया है कि पंजाब पुलिस द्वारा उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर और संबंधित कार्रवाई को विधानसभा की विशेषाधिकार समिति को भेजकर जांच की जाए।
मंत्री ने पत्र में कहा कि पंजाब पुलिस की ओर से इकबाल सिंह की शिकायत पर दर्ज एफआईआर और उससे जुड़ी कार्रवाई दिल्ली विधानसभा की कार्यवाही के प्रकाशन पर संवैधानिक सुरक्षा का उल्लंघन है। आर्टिकल 361 ए के अनुसार, संसद या राज्य विधानमंडल की कार्यवाही की काफी हद तक सही रिपोर्ट के प्रकाशन पर कोई व्यक्ति पर सिविल या आपराधिक कार्रवाई नहीं की जा सकती, जब तक साबित न हो कि यह दुर्भावना से किया गया था। यह सुरक्षा गुप्त बैठकों पर लागू नहीं होती।
कपिल मिश्रा ने याद दिलाया कि 6 जनवरी 2026 को दिल्ली विधानसभा में विपक्ष की नेता आतिशी ने सिख गुरुओं के बारे में कथित आपत्तिजनक टिप्पणी की, जिससे सदन में हंगामा हो गया और कार्यवाही बाधित हुई। 9 जनवरी को मुख्य सचेतक अभय वर्मा ने सदन को बताया कि जालंधर पुलिस ने एक एफआईआर दर्ज की है, जिसमें आरोप है कि कपिल मिश्रा ने सदन की कार्यवाही की छेड़छाड़ की हुई वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर अपलोड की।
उन्होंने जालंधर पुलिस कमिश्नर की प्रेस रिलीज का जिक्र करते हुए कहा कि वीडियो उनके अकाउंट से डाउनलोड किया गया और उन पर जानबूझकर छेड़छाड़ का आरोप लगाया गया। इस एफआईआर को मीडिया में काफी कवरेज मिला और संबंधित रिपोर्ट्स की कॉपी पत्र के साथ संलग्न की गई हैं।
मंत्री ने जोर देकर कहा कि उन्होंने जो वीडियो क्लिप शेयर किया, वह दिल्ली विधानसभा की कार्यवाही का सही और सटीक हिस्सा था। इसलिए यह पूरी तरह आर्टिकल 361ए की सुरक्षा के दायरे में आता है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह एफआईआर एक चुने हुए विधायक के विशेषाधिकारों को कमजोर करने और उनके विधायी कर्तव्यों को निर्वहन में डराने-धमकाने की कोशिश है। इकबाल सिंह और पंजाब पुलिस अधिकारियों का आचरण संवैधानिक गारंटियों की उपेक्षा और सदन के सामूहिक विशेषाधिकारों का उल्लंघन दर्शाता है।
यह विवाद दिल्ली विधानसभा और पंजाब पुलिस के बीच तनाव का कारण बन गया है। पहले दिल्ली विधानसभा ने पंजाब पुलिस के अधिकारियों को नोटिस जारी किए थे। लेकिन, अब कपिल मिश्रा ने स्पीकर से सीधे विशेषाधिकार समिति को मामला भेजने की मांग की है।

