January 5, 2026
Entertainment

दिल्ली शब्दोत्सव 2026 : आज समाज गर्व से कहता है कि वह धार्मिक है, यह बदलाव क्रांतिकारी है : अभिनेत्री भाषा सुम्बुली

Delhi Shabdotsav 2026: Today society proudly says that it is religious, this change is revolutionary: Actress Bhasha Sumbuli

राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित ‘शब्दोत्सव 2026’ में साहित्य और फिल्म जगत के कई नामचीन कलाकारों ने हिस्सा लिया। इस मौके पर अभिनेत्री भाषा सुम्बुली ने धर्म, संस्कृति और राष्ट्रवाद पर अपनी गहरी सोच साझा की। उनका मानना है कि बड़े पर्दे पर दर्शाए जाने वाले विषयों में सिर्फ मनोरंजन ही नहीं, बल्कि समाज और संस्कृति की सही झलक भी दिखाने चाहिए।

भाषा सुम्बुली ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, ”धर्म और संस्कृति एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और राष्ट्रवाद कभी भी धर्म के विरोध में नहीं होता। धर्म में विश्वास और निष्ठा से ही व्यक्ति और समाज का विकास संभव है।”

उन्होंने कहा, ”मेरे जीवन में धर्म ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और यही वजह है कि मैं आज जिस मुकाम पर हैं, वहां पहुंच पाई हैं। आज का समाज इस बात पर गर्व करता है कि वह धार्मिक है और यह बदलाव समाज में क्रांतिकारी है। जेनजी भी अब धर्म और संस्कृति की ओर आकर्षित हो रहे हैं और यह बहुत सकारात्मक संकेत है।”

भाषा ने बड़े पर्दे और फिल्मों के माध्यम से धर्म और संस्कृति के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, ”लोग ऐसी फिल्में देखना पसंद करते हैं, जो उनकी संस्कृति और धार्मिक पहचान को दर्शाती हों। उदाहरण के लिए गांवों में आज भी रामलीला का आयोजन होता है। भले ही दर्शक रामलीला में हुई घटनाओं को जानते हैं, लेकिन इसमें जो जुड़ाव और भावनात्मक कनेक्शन है, वह उन्हें काफी प्रभावित करता है।”

उन्होंने कहा, ”जब लोगों की अस्मिता और सांस्कृतिक चेतना जागृत होती है, तो समाज का गौरव लौटता है और यही विकास की दिशा में एक कदम होता है।”

उन्होंने कहा, ”साल 2010 में जब मैं दिल्ली में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में पढ़ रही थीं, तो भारतीय संस्कृति और इतिहास से अवगत कराने के लिए दिल्ली के विभिन्न ऐतिहासिक मकबरों और स्थलों पर ले जाया गया। उस समय मेरे मन में कई सवाल और घुटन थी।”

भाषा ने कहा, ”मैं कश्मीरी हिंदू हूं। यह घुटन और सवाल तब समाप्त हुआ जब मैं अपनी माता जी के साथ बनारस गई और दशाश्वमेध घाट पर पहली बार गंगा आरती देखी। इस अनुभव ने मुझे तमस और भ्रम से बाहर निकाला और भारतीय संस्कृति की वास्तविकता को समझने का अवसर दिया। यह अनुभव मेरे लिए बहुत खास और जादुई था। आरती के दौरान जो भाव और वातावरण मैंने महसूस किया, वह जीवन पर भी असर डालता है।”

भाषा सुम्बुली ने कहा, ”धर्म, संस्कृति और राष्ट्रवाद का सही मिश्रण समाज के लिए मार्गदर्शक हो सकता है। बड़े पर्दे पर इन विषयों को सही तरीके से प्रस्तुत करना न केवल मनोरंजन का काम करता है, बल्कि लोगों की सोच और जागरूकता को भी बढ़ाता है। फिल्में और थिएटर समाज के भीतर चेतना और गौरव लौटाने का महत्वपूर्ण जरिया बन सकते हैं।”

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