January 3, 2026
National

दिल्ली शब्दोत्सव 2026: नाम बदलने से क्या होता है? पूर्व एएसआई निदेशक ने दिया इसका जवाब

Delhi Shabdotsav 2026: What happens if you change your name? Former ASI Director answers.

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के पूर्व निदेशक धर्मवीर शर्मा ने ‘नामकरण’ पर राजनीति करने वाले विरोधियों को करारा जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि नाम बदलने से इतिहास खत्म हो जाता है और यही प्रयास भारत व सनातन धर्म के इतिहास को मिटाने के लिए किए गए। उन्होंने दिल्ली स्थित कुतुब मीनार और उत्तर प्रदेश के फतेहपुर सीकरी का उदाहरण दिया।

एएसआई के पूर्व निदेशक धर्मवीर शर्मा शनिवार को ‘दिल्ली शब्दोत्सव 2026’ में शामिल हुए। उन्होंने भारतीय संस्कृति और साहित्य को लेकर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा, “आजकल लोग नाम बदलने पर बड़ा विरोध करते हैं। सेक्युलरवादी सोच रखने वाले लोग कहते हैं कि नाम बदलने से क्या होता है। असल में नाम बदलने से इतिहास खत्म हो जाता है। जो विजयपुर सीकरी सिकरवारों का बनाया हुआ नगर था, उसे आज फतेहपुर सीकरी कहा जाता है। यह किस तरह का इतिहास पढ़ाया जाता है?”

कुतुब मीनार का जिक्र करते हुए पूर्व एएसआई निदेशक ने कहा, “आज जिसे कुतुब मीनार कहा जाता है, वह एक वेधशाला है। मैंने इसको लेकर लंबे समय तक काम और अध्ययन किया। कुतुब मीनार 25 इंच दक्षिण की तरफ झुकी है। क्योंकि 21 जून को सूर्य दक्षिणायन में आता है, जिसका समय दोपहर 12 बजे से लेकर 12.30 या कभी इससे अधिक होता है, उस समय कुतुब मीनार की छाया नहीं बनती है। इसका साहित्यिक प्रमाण के साथ-साथ पुरात्विक प्रमाण भी है। 25 इंच झुकाव वाली कुतुब मीनार से यह पता करना था कि सूर्य किस समय उत्तरायण से दक्षिणायन में आता है।”

उन्होंने कहा कि कुतुब मीनार के चारों ओर 27 नक्षत्रों के मंदिर थे, जिन्हें जोड़ा गया और उसके मलबे से जामा मस्जिद बनाई गई।

पूर्व एएसआई निदेशक ने दावा किया, “कुतुब मीनार की 27 खिड़कियां इस बात का प्रमाण हैं कि यह 27 नक्षत्रों के लिए बनाई गईं। इसका मुख्य द्वार उत्तर यानी ध्रुव की तरफ है। कुतुबुद्दीन ऐबक ने एक लेख में लिखा कि उसने 27 मंदिरों के मलबे से जामा मस्जिद का निर्माण किया। उसने 27 मंदिरों का जिक्र किया, यह मेरे अध्ययन में बहुत काम आया। अगर लेख में इसका जिक्र न होता तो मैं इस निर्णय तक नहीं पहुंच पाता कि 27 मंदिर कुतुब मीनार के चारों तरफ थे। कुतुब मीनार के बीच में ‘विष्णु ध्वज’ है। यह वेधशाला के मध्य में बना होता है, जिससे सूर्य का अध्ययन किया जाता है। यह सूर्य मंदिर है और इसके चारों तरफ नक्षत्रों के मंदिर थे। उन मंदिरों को तोड़कर उसने जामा मस्जिद बनाई।”

उन्होंने कहा कि पूरा विश्व सनातन इतिहास का प्रतीक है। किसी भी देश की भाषा में संस्कृत के हजारों शब्द मिलते हैं। उदाहरण के तौर पर ‘नम:’ शब्द से ‘नमाज’ बना। संस्कृत दुनिया की सभी भाषाओं की मां है।” धर्मवीर शर्मा ने चिंता जताते हुए कहा कि आज जिस तरह संस्कृत का पतन हो रहा है, यह दुर्भाग्यपूर्ण है।

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