24 अप्रैल । पश्चिम बंगाल में गुरुवार को संपन्न पहले चरण के चुनाव में मतदान प्रतिशत 92 फीसदी से अधिक दर्ज किया गया। मतदान प्रतिशत को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने संतोष और खुशी जाहिर की है। सर्वोच्च अदालत ने इसे लोकतंत्र के लिए सकारात्मक संकेत बताते हुए कहा कि बड़ी संख्या में लोगों का मतदान में हिस्सा लेना देश की लोकतांत्रिक परंपरा को मजबूत करता है।
एक सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत का एक नागरिक होने के नाते मैं मतदान प्रतिशत देखकर बहुत खुश हूं। जब लोग वोट डालते हैं तो लोकतंत्र मजबूत होता है। जब नागरिक अपने वोट की अहमियत समझते हैं, तो वे हिंसा से दूर रहते हैं। इस दौरान जस्टिस बागची ने भी चुनाव प्रक्रिया को लेकर संतोष व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि पहले चरण के दौरान किसी बड़ी हिंसक घटना की खबर सामने नहीं आई, जो एक सकारात्मक संकेत है। उन्होंने कहा कि राजाओं के बीच युद्ध होता है, लेकिन जान आम लोगों की जाती है।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी मतदान को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि 92 फीसदी से अधिक मतदान लोकतंत्र के प्रति जनता के विश्वास को दर्शाता है। कुछ छिटपुट घटनाओं को छोड़ दिया जाए तो चुनाव पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने इस दौरान शानदार काम किया है।
पश्चिम बंगाल में संपन्न पहले चरण की वोटिंग में 91.78 प्रतिशत दर्ज किया गया। यह 2011 में बने पिछले रिकॉर्ड 84.72 प्रतिशत से भी ज्यादा था। महिलाओं की भागीदारी एक बार फिर सबसे आगे रही, जो 92.69 प्रतिशत थी। इसकी तुलना में पुरुष मतदाताओं में यह 90.92 प्रतिशत थी। यह महिलाओं की चुनावी भागीदारी के एक राष्ट्रीय रुझान को दिखाता है। इस मतदान का पैमाना इसलिए भी खास तौर पर ध्यान देने लायक है, क्योंकि पश्चिम बंगाल में पहले से ही ऐतिहासिक रूप से मतदान का प्रतिशत काफी ज्यादा रहा है, जो अक्सर देश में सबसे ज्यादा प्रतिशत में से एक होता है।

