हरियाणा सरकार ने हरियाणा राज्य संबद्ध एवं स्वास्थ्य सेवा परिषद (एचएसएएचसी) का गठन किया है, जिसकी अध्यक्षता रोहतक स्थित स्नातकोत्तर चिकित्सा विज्ञान संस्थान (पीजीआईएमएस) के डॉ. सुरेश कुमार सिंघल को की गई है। परिषद हरियाणा में संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों द्वारा पालन किए जाने वाले पेशेवर आचरण, आचार संहिता और शिष्टाचार को लागू करेगी और अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगी, जिसमें राज्य रजिस्टर से किसी पेशेवर का नाम हटाना भी शामिल है।
यह शिक्षा, पाठ्यक्रम, पाठ्यचर्या, भौतिक और शिक्षण सुविधाओं, कर्मचारियों की संरचना, कर्मचारियों की योग्यता, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, मूल्यांकन, परीक्षा, प्रशिक्षण, अनुसंधान और सतत व्यावसायिक शिक्षा के न्यूनतम मानकों को भी सुनिश्चित करेगा।
चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशक या उनके प्रतिनिधि; पं. नेकी राम शर्मा सरकारी चिकित्सा महाविद्यालय (जीएमसी), भिवानी के निदेशक; और भगत फूल सिंह सरकारी महिला चिकित्सा महाविद्यालय, खानपुर कलां, सोनीपत की डीन परिषद के पदेन सदस्य होंगे। अध्यक्ष सहित कुल 24 सदस्यों को परिषद के लिए मनोनीत किया गया है।
राष्ट्रीय संबद्ध एवं स्वास्थ्य सेवा आयोग अधिनियम, 2021 की धारा 22 के तहत तदर्थ आधार पर इस परिषद का गठन किया गया है। इस परिषद का कार्यकाल स्थायी परिषद के गठन तक रहेगा। चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा द्वारा दिनांक 27 जुलाई को जारी अधिसूचना के अनुसार, परिषद के सदस्यों को कोई अतिरिक्त वित्तीय लाभ या पारिश्रमिक नहीं दिया जाएगा। यदि कोई मनोनीत व्यक्ति परिषद की लगातार तीन बैठकों में उपस्थित नहीं होता है, तो उस सदस्य की सदस्यता समाप्त मानी जाएगी।
दस अलग-अलग क्षेत्रों से दो-दो सदस्यों को भी नामांकित किया गया है। इन क्षेत्रों में मेडिकल लेबोरेटरी और लाइफ साइंसेज; ट्रॉमा, बर्न केयर और सर्जिकल/एनेस्थीसिया; फिजियोथेरेपी; न्यूट्रिशन साइंस; ऑप्थेल्मिक साइंसेज; ऑक्यूपेशनल थेरेपी; कम्युनिटी केयर बिहेवियरल हेल्थ साइंसेज; मेडिकल रेडियोलॉजी इमेजिंग और थेरेप्यूटिक; मेडिकल इक्विपमेंट टेक्नोलॉजी; और हेल्थ इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट और हेल्थ इन्फॉर्मेटिक्स शामिल हैं।
राष्ट्रीय संबद्ध एवं स्वास्थ्य सेवा व्यवसाय आयोग अधिनियम, 2021 की धारा 30 के अनुसार, राज्य परिषद का यह कर्तव्य है कि वह इस अधिनियम के अंतर्गत डिप्लोमा, स्नातक, स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट स्तर पर संबद्ध एवं स्वास्थ्य सेवा संस्थानों में प्रवेश के लिए एकसमान प्रवेश परीक्षा और सामान्य परामर्श सुनिश्चित करे। यह संबद्ध एवं स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों के लिए एकसमान निकास या लाइसेंसिंग परीक्षा भी सुनिश्चित करेगी।
इस संस्था का दायित्व है कि वह संबद्ध एवं स्वास्थ्य सेवा संस्थानों का निरीक्षण करे और उन्हें पंजीकृत करे। साथ ही, यह मशीनरी, सामग्री और सेवाओं के लिए न्यूनतम मानक ढांचा सुनिश्चित करेगी। मानकों का पालन न करने पर यह संस्थाओं पर जुर्माना भी लगा सकती है।

