शाहूरा गांव में उस समय मातम छा गया जब आर्थिक तंगी से जूझ रहे एक दिहाड़ी मजदूर ने कथित तौर पर जहरीला पदार्थ खाकर अपनी दो नाबालिग बेटियों को भी पिला दिया, जिससे तीनों की मौत हो गई। खबरों के मुताबिक, यह घटना घोर आर्थिक संकट के कारण घटी। इस घटना से पूरा गांव सदमे में आ गया, क्योंकि श्मशान घाट पर एक साथ तीन चिताएं जलाई गईं।
मृतकों की पहचान दिहाड़ी मजदूर लवप्रीत सिंह और उनकी बेटियों जसप्रीत कौर (8) और वीरपाल कौर (6) के रूप में हुई है। गरीबी और बेरोजगारी के कारण लवप्रीत सिंह अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए संघर्ष कर रहे थे और बड़ी मुश्किल से गुजारा कर पा रहे थे। उनकी पत्नी कुलदीप कौर भी घर चलाने में मदद के लिए एक किराने की दुकान पर काम करती थीं।
परिवार के सदस्यों के अनुसार, घटना वाले दिन लवप्रीत सिंह अपनी पत्नी को उसके कार्यस्थल पर छोड़कर घर लौट आया, जहाँ उसने कथित तौर पर जहर खा लिया और अपनी दोनों बेटियों को भी जहर पिला दिया। जब उनकी हालत बिगड़ी तो उन्हें अमृतसर के एक अस्पताल में ले जाया गया, जहाँ इलाज के दौरान तीनों की मौत हो गई।
लवप्रीत सिंह के परिवार में उनकी पत्नी और एक नाबालिग बेटा नबी नूर हैं। परिजनों का आरोप है कि अत्यधिक गरीबी के बावजूद, परिवार को इलाके के किसी भी राजनीतिक या धार्मिक नेता से कोई सहायता नहीं मिली। लवप्रीत के चाचा अजीत सिंह ने बताया कि रोजगार की कमी और बढ़ते आर्थिक दबाव के कारण उनका भतीजा गंभीर तनाव में था।
लोपोके पुलिस ने जांच कार्यवाही शुरू की। कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद शवों को अंतिम संस्कार के लिए परिवार को सौंप दिया गया।


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