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ईस्टर बम धमाके की जांच दोबारा शुरू, एनटीजे के दक्षिण भारत के कट्टरपंथी नेटवर्क दायरे में

Easter bombing investigation reopens, NTJ's South India radical network under scanner

27 फरवरी । वर्ष 2019 में श्रीलंका में हुए ईस्टर संडे बम धमाकों की जांच में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है। इस केस में श्रीलंका के पूर्व खुफिया प्रमुख सुरेश सैली को गिरफ्तार कर लिया गया है। श्रीलंका में हुए इस बम धमाके में 279 लोगों की मौत हो गई थी। श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने हमले में शामिल सभी लोगों को न्याय के कटघरे में लाने का वादा किया था।

बता दें कि गोटाबाया राजपक्षे के राष्ट्रपति बनने के बाद वर्ष 2019 में सुरेश सैली को राज्य खुफिया सेवा (एसआईएस) का प्रमुख बनाया गया था। सुरेश सैली पर आरोप था कि उसने 2019 के राष्ट्रपति चुनाव को प्रभावित करने के इरादे से हमले की अनुमति दी थी। जिसे अंततः राजपक्षे ने जीत लिया था। सुरेश सैली श्रीलंका में एक प्रमुख व्यक्ति बन गया था और उसे एलटीटीई के विघटन का श्रेय दिया जाता है। सुरेश सैली की गिरफ्तारी से राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है। कई लोगों का मानना ​​है कि इससे एलटीटीई से संबंधित तनाव फिर से बढ़ सकता है।

श्रीलंका के पूर्व विदेश मंत्री अली साबरी ने कहा कि ये घटनाक्रम बेहद चिंताजनक हैं। वहीं, एक भारतीय अधिकारी ने कहा कि श्रीलंका में हो रहे घटनाक्रमों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। सुरेश सैली की गिरफ्तारी के बाद एलटीटीई का मुद्दा फिर से उठने की आशंका के सवाल पर अधिकारी ने कहा कि प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन यह बेहद मुश्किल होगा।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) एलटीटीई के पुनरुत्थान से जुड़े कई मामलों की जांच कर रही है। आईएसआई ने भी एलटीटीई को पुनर्जीवित करने की कोशिश की है, लेकिन अब तक उसे सफलता नहीं मिली है। एलटीटीई के पुनरुत्थान को रोकने के लिए भारत और श्रीलंका दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि श्रीलंका के साथ मौजूदा संबंध वैचारिक से हटकर निवेश-आधारित साझेदारी में तब्दील हो गए हैं। अधिकारी ने आगे बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति दिसानायके के बीच व्यावहारिक संबंध हैं। सुरक्षा समेत सभी क्षेत्रों में सहयोग सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

बता दें कि हमले का मास्टरमाइंड मोहम्मद जहरान हाशिम अक्सर तमिलनाडु आता-जाता रहता था। वह जेमेशा मुबीन के कट्टरपंथीकरण के लिए भी जिम्मेदार था, जिसने 2022 में कोयंबटूर में एक मंदिर पर बम से हमला करने का असफल प्रयास किया था। भारतीय एजेंसियां ​​हाशिम की भूमिका की सक्रिय रूप से जांच कर रही हैं। दक्षिण भारत में कट्टरपंथ के मामले में एनआईए की जांच से पता चला कि पूरी साजिश हाशिम द्वारा श्रीलंका से चलाई जा रही थी।

एजेंसी द्वारा जब्त किए गए 100 कट्टरपंथ संबंधी वीडियो में से कम से कम 50 हाशिम के थे, जिसके इस्लामिक स्टेट से संबंध थे। अधिकारियों का कहना है कि सुरेश सैली जांचकर्ताओं को हाशिम द्वारा संचालित मॉड्यूल के बारे में जानकारी दे सकता है। ईस्टर बम धमाकों के दौरान आत्मघाती हमलावरों का सरगना रहे हाशिम ने भारत में काफी समय बिताया था।

एनआईए की जांच में पता चला है कि भारत में रहते हुए हाशिम ने अपने कट्टरपंथ अभियानों को मुख्य रूप से मल्लपुरम, कोयंबटूर, नागपट्टिनम, कन्याकुमारी, रामनाथपुरम, वेल्लोर, त्रिची और तिरुनेलवेली में केंद्रित किया था। पल्ले ने फिलहाल ईस्टर बम धमाकों से किसी भी तरह के संबंध से इनकार किया है। भारतीय अधिकारियों का कहना है कि वे पल्ले और उनके कथित संबंधों पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते।

हालांकि, अधिकारी ने यह भी कहा कि बम धमाकों की गहन जांच आवश्यक है क्योंकि एनटीजे की गतिविधियों का भारत, विशेष रूप से दक्षिणी राज्यों पर सीधा प्रभाव पड़ता है।

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