16 फरवरी (आईएएनएस)। निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने पश्चिम बंगाल के सात अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। यह कार्रवाई एसआईआर के कामों में लापरवाही के बाद की गई है।
आयोग ने यह कार्रवाई जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 13सीसी के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए की है। चुनाव आयोग के अनुसार, संबंधित अधिकारियों पर गंभीर कदाचार, ड्यूटी में लापरवाही और वैधानिक शक्तियों के दुरुपयोग के आरोप हैं। ईसीआई ने स्पष्ट किया कि चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
इसके साथ ही चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को भी निर्देश दिया है कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ उनके कैडर कंट्रोलिंग अथॉरिटी के माध्यम से बिना किसी देरी के अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाए। चुनाव आयोग ने यह भी कहा है कि शुरू की गई कार्रवाई की जानकारी शीघ्र ही उसे उपलब्ध कराई जाए।
मिली जानकारी के अनुसार, निलंबित अधिकारियों में 56-समसेरगंज विधानसभा क्षेत्र (जिला मुर्शिदाबाद) के एईआरओ डॉ. सेफौर रहमान, 55-फरक्का विधानसभा क्षेत्र के एईआरओ एवं रेवेन्यू ऑफिसर नीतीश दास, 16-मयनागुड़ी विधानसभा क्षेत्र की एईआरओ दलिया रे चौधरी, 57-सुती विधानसभा क्षेत्र के एईआरओ मुर्शिद आलम शामिल हैं। इसके अलावा, 139-कैनिंग पुरबो विधानसभा क्षेत्र के एईआरओ के रूप में कार्यरत सत्यजीत दास (जॉइंट बीडीओ) और जॉयदीप कुंडू (एफईओ) को भी निलंबित किया गया है। 229-डेबरा विधानसभा क्षेत्र के एईआरओ एवं जॉइंट बीडीओ देबाशीष बिस्वास का नाम भी इस सूची में शामिल है।
पश्चिम बंगाल में आगामी चुनावी गतिविधियों को देखते हुए यह निर्णय और भी अहम माना जा रहा है। हालांकि, अभी तक राज्य सरकार की ओर से इस मामले में कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन मुख्य सचिव को दिए गए निर्देशों के बाद विभागीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है। चुनाव आयोग ने दो टूक कहा है कि चुनावी कार्य में किसी भी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। चुनाव आयोग की इस सख्त कार्रवाई से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि आयोग चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता से कोई समझौता नहीं करेगा और आवश्यक होने पर अपने वैधानिक अधिकारों का प्रयोग करते हुए कठोर कदम उठाता रहेगा।

