प्रस्तावित विद्युत संशोधन विधेयक, 2025 के विरोध में आज राज्य भर में प्रदर्शन हुए। हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड (HPSEBL) के सैकड़ों कर्मचारियों, इंजीनियरों और पेंशनभोगियों ने कर्मचारी, इंजीनियर और पेंशनभोगियों की संयुक्त कार्य समिति (JAC) के बैनर तले शिमला और धर्मशाला में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार की विद्युत क्षेत्र नीतियों के खिलाफ जोरदार आवाज उठाई।
शिमला स्थित एचपीएसईबीएल मुख्यालय में कर्मचारियों ने विद्युत (संशोधन) विधेयक के खिलाफ नारे लगाए। इस अवसर पर अखिल भारतीय विद्युत महासंघ के संरक्षक सुनील ग्रोवर और संयुक्त कार्रवाई समिति के सह-संयोजक हीरा लाल वर्मा ने सभा को संबोधित किया। यह विरोध प्रदर्शन राष्ट्रीय विद्युत कर्मचारी एवं अभियंता समन्वय समिति (एनसीसीओईईई) द्वारा बुलाई गई राष्ट्रव्यापी प्रतीकात्मक हड़ताल के अंतर्गत आयोजित किया गया था। प्रदर्शन के दौरान, कर्मचारियों ने प्रस्तावित विद्युत (संशोधन) विधेयक को जनविरोधी, कर्मचारीविरोधी और राष्ट्रविरोधी करार दिया और इसे तत्काल वापस लेने की मांग की।
संयुक्त कार्रवाई समिति के संयोजक लोकेश ठाकुर और हीरा लाल वर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार बिजली क्षेत्र को बड़े निजी निगमों के हाथों में सौंपने के उद्देश्य से नीतियां अपना रही है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित विधेयक के माध्यम से निजी कंपनियों को बिजली वितरण क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे सार्वजनिक क्षेत्र की बिजली कंपनियां कमजोर होंगी और उपभोक्ताओं पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा।
उन्होंने आगे कहा कि विधेयक में एक ही क्षेत्र में कई वितरण लाइसेंसधारियों, तार और आपूर्ति व्यवसाय के पृथक्करण और लागत-अनुरूप टैरिफ लागू करने जैसे प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि ये उपाय अंततः बिजली क्षेत्र के निजीकरण का मार्ग प्रशस्त करेंगे और आम उपभोक्ताओं के लिए बिजली को और महंगा बना देंगे।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार ने ‘जनविरोधी’ और ‘कर्मचारी विरोधी विधेयक’ को वापस नहीं लिया, तो देश भर के बिजली कर्मचारी, इंजीनियर और पेंशनभोगी राष्ट्रीय संगठनों के समन्वय से अपने आंदोलन को तेज करेंगे। नेताओं ने यह भी कहा कि हिमाचल प्रदेश जैसे कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्य में बिजली वितरण का निजीकरण जनहित के विरुद्ध होगा। इससे एचपीएसईबीएल, कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा और पेंशनभोगियों की सामाजिक सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।


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