N1Live Himachal विशेषज्ञों ने आईआईएएस-शिमला में विकसित भारत के मार्ग पर विचार-विमर्श किया।
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विशेषज्ञों ने आईआईएएस-शिमला में विकसित भारत के मार्ग पर विचार-विमर्श किया।

Experts deliberate on the path to a developed India at IIAS-Shimla.

शिमला स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडी (आईआईएएस) ने सोमवार को ‘विकसित भारत 2047: चुनौतियां और अवसर’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन किया, जिसका उद्देश्य भारत के विकसित भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य की दिशा में समग्र, समावेशी और सतत विकास पर बौद्धिक चर्चा को बढ़ावा देना है।

संगोष्ठी के संयोजक और बीकानेर स्थित महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर मनोज दीक्षित ने अपने उद्घाटन भाषण में विषय की वैचारिक रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने शासन, शिक्षा, पर्यावरण, सामाजिक समावेशन और आर्थिक विकास सहित विभिन्न क्षेत्रों में विकसित भारत 2047 की परिकल्पना को रेखांकित किया।

लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर आर.के. मिश्रा ने मुख्य भाषण देते हुए भारत के विकास पथ में मौजूद चुनौतियों और अवसरों का गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया। उन्होंने दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए समन्वित नीतिगत दृष्टिकोणों की आवश्यकता पर भी बल दिया।
सत्र की अध्यक्षता करते हुए, आईआईएएस के निदेशक, प्रोफेसर हिमांशु कुमार चतुर्वेदी ने विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण को एक व्यापक राष्ट्रीय संकल्प के रूप में वर्णित किया। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य आर्थिक प्रगति से परे जाकर सांस्कृतिक चेतना, बौद्धिक परंपराओं और सामाजिक सद्भाव को भी समाहित करता है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय उन्नत अध्ययन संस्थान जैसे संस्थान अंतर्विषयक संवाद, गहन शोध और निरंतर बौद्धिक विचार-विमर्श के माध्यम से महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और नीति निर्माताओं के बीच इस तरह की सहभागिता नीति निर्माण प्रक्रिया को मजबूत बनाने में सहायक हो सकती है, जिससे यह अधिक सशक्त, संवेदनशील और समावेशी बन सकेगी।

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