चौधरी सरवन कुमार (सीएसके) हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर ने अपने डॉ. जी.सी. नेगी पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय के माध्यम से कांगड़ा जिले के किसानों के लिए वैज्ञानिक पशुधन और बकरी पालन में उनके कौशल को बढ़ाने के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रमों की एक श्रृंखला का आयोजन किया।
सत्रों की अध्यक्षता करने वाले कुलपति डॉ. एके पांडा ने महिलाओं और ग्रामीण युवाओं के लिए पशुपालन और बकरी पालन को स्थायी आजीविका विकल्प के रूप में अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कृषि आय में सुधार और ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत करने में पोषण उद्यानों, मुर्गी पालन और संबंधित उद्यमशीलता गतिविधियों के महत्व को भी रेखांकित किया।
कॉलेज के कार्यवाहक डीन पंकज सूद और कांगड़ा स्थित पशुपालन विभाग के अतिरिक्त निदेशक संजीव कटोच ने किसानों को उपलब्ध विभिन्न सरकारी योजनाओं, सब्सिडी और संस्थागत सहायता के बारे में जानकारी दी। उन्होंने प्रतिभागियों को उत्पादकता और लाभप्रदता बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक प्रबंधन पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।
ये कार्यक्रम पशु चिकित्सा एवं पशुपालन विस्तार शिक्षा विभाग के प्रमुख संजय कुमार खुराना और पशुधन उत्पादन प्रबंधन विभाग के प्रमुख एस कटोच के नेतृत्व में विभिन्न परियोजनाओं के तहत आयोजित किए गए थे। देवेश ठाकुर, राकेश ठाकुर, निशांत वर्मा, प्रवीण शर्मा, अंकाज ठाकुर, रोहित कुमार और मीसम रजा सहित विशेषज्ञों की एक टीम ने पशुधन प्रबंधन, रोग निवारण, चारा खिलाने की प्रथाओं और लाभदायक बकरी पालन मॉडल पर व्याख्यान दिए और व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया।
कार्यक्रम का समापन प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरण के साथ हुआ। आयोजकों ने कहा कि इस क्षेत्र में किसानों को वैज्ञानिक ज्ञान से लैस करने, उत्पादकता बढ़ाने और पशुपालन आधारित आजीविका को मजबूत करने के लिए ऐसी पहल अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।


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