आज दोपहर सोलन के पास बसल पंचायत के वन क्षेत्र में जीवन रक्षक दवाओं का एक बड़ा ढेर मिला, जिसकी एक्सपायरी डेट निकल चुकी थी।
स्थानीय ग्रामीणों से शिकायत मिलने के बाद औषधि विभाग के अधिकारियों ने जांच शुरू की। अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लेने के लिए इलाके का दौरा किया। सहायक लाइसेंसिंग अधिकारी गरिमा शर्मा ने बताया, “चूंकि कचरे के ढेर से कुछ नोट भी जब्त किए गए हैं, इसलिए अधिकारी बड़ी मात्रा में मादक पदार्थों के इस ढेर के स्रोत का पता लगा रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि खुले क्षेत्र में रासायनिक अपशिष्ट फेंकना प्रदूषण नियंत्रण नियमों का उल्लंघन भी है।
जांच में पता चला कि एक्सपायर्ड दवाओं का ढेर एक थोक व्यापारी का था। वहीं, बसल पंचायत के निवासियों ने एक्सपायर्ड दवाओं को फेंकने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। खबरों के अनुसार, जीवन रक्षक दवाएं बसल हेलीपैड के पास जंगल में फेंकी गई थीं। इन दवाओं की बड़ी मात्रा जानवरों द्वारा बिखेर दी गई, जिससे आशंका जताई जा रही है कि कहीं उन्होंने इन्हें खा तो नहीं लिया, क्योंकि यह ढेर उस क्षेत्र में मिला जहां जानवर आमतौर पर चरते हैं।
अधिकारियों ने बताया कि दोषी व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए उनके पास सीमित विकल्प थे, लेकिन थोक विक्रेता को कचरा इकट्ठा करने और वैज्ञानिक तरीके से उसका निपटान करने का निर्देश देने जैसी कार्रवाई की जा सकती थी।


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