N1Live National एक्सप्लेनर: जानिए कैसे सरकार के ‘अंत्योदय’ मंत्र से सबसे वंचित वर्गों तक पहुंच रहा विकास
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एक्सप्लेनर: जानिए कैसे सरकार के ‘अंत्योदय’ मंत्र से सबसे वंचित वर्गों तक पहुंच रहा विकास

Explainer: How the government's 'Antyodaya' mantra is taking development to the most deprived sections.

12 जून । सरकार के ‘अंत्योदय’ मंत्र ने भारत के सबसे पिछड़े और वंचित समुदायों को समावेशी विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में सफलता हासिल की है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना रहा है कि जो लोग अब तक विकास की दौड़ में पीछे रह गए थे, उन्हें अवसर और प्रगति के केंद्र में लाया जाए। यह जानकारी शुक्रवार को जारी एक आधिकारिक फैक्टशीट में दी गई।

फैक्टशीट में बताया गया है कि इन प्रयासों को 24,104 करोड़ रुपए की प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) योजना के माध्यम से आगे बढ़ाया गया। यह योजना विशेष रूप से अत्यंत कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) के लिए बनाई गई है। ये भारत के सबसे अलग-थलग और पिछड़े समुदायों में शामिल हैं, जिनमें से कई लोग पक्के घर, स्वच्छ पेयजल, बिजली और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित थे।

सरकार ने नवंबर 2023 में पीएम जनमन योजना लॉन्च की थी, ताकि विभिन्न मंत्रालयों के समन्वित प्रयासों के जरिए इन कमियों को दूर किया जा सके। यह कार्यक्रम 18 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में रहने वाले 75 पीवीटीजी समुदायों को लक्षित करता है और 9 मंत्रालयों द्वारा कार्यान्वित 11 प्रमुख हस्तक्षेपों के माध्यम से कार्य करता है।

इन 11 हस्तक्षेपों में आवास, सड़क संपर्क, पाइप से पेयजल आपूर्ति, मोबाइल चिकित्सा इकाइयां, आंगनवाड़ी केंद्र, छात्रावास, विद्युतीकरण, मोबाइल टावर, बहुउद्देश्यीय केंद्र, वन धन विकास केंद्र और व्यावसायिक कौशल प्रशिक्षण शामिल हैं।

फैक्टशीट के अनुसार, जनजातीय गांवों में 7.8 लाख पक्के घर बनाए जा चुके हैं और 28,303 से अधिक गांवों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाया गया है। वहीं, 5,89,812 जनजातीय परिवारों को बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार हुआ है।

जनजातीय क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे का तेजी से विस्तार हुआ है। वंचित समुदायों के विद्यार्थियों को शिक्षा के अधिक अवसर मिले हैं। सफाई कर्मियों को संस्थागत पहचान और सुरक्षा संबंधी बेहतर सुविधाएं मिली हैं। वहीं, पिछड़े और घुमंतू समुदायों को भी लक्षित कल्याणकारी योजनाओं के दायरे में लाया गया है।

पिछले 12 वर्षों में एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों के विस्तार ने दूर-दराज के जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किया है। वर्ष 2018 के बाद इन विद्यालयों का तेजी से विस्तार हुआ, जिससे अनुसूचित जनजाति समुदायों को आधुनिक आवासीय शिक्षा की सुविधा उनके क्षेत्रों के करीब ही मिलने लगी। वर्ष 2026 तक 499 विद्यालयों में 1.56 लाख से अधिक छात्र नामांकित हैं, जबकि 323 नए विद्यालय निर्माणाधीन हैं।

इस बदलाव का असर भौगोलिक स्तर पर भी दिखाई दिया है। जनजातीय क्षेत्र, आकांक्षी जिले और दूरस्थ बस्तियां अब विकास योजनाओं और निगरानी का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई हैं। विभिन्न मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय से उन क्षेत्रों तक भी योजनाओं का लाभ पहुंचा है, जिन्हें पहले पहुंच से बाहर माना जाता था।

इसी तरह, वर्ष 2021 में शुरू की गई पीएम-अजय योजना अनुसूचित जाति बहुल गांवों के समग्र विकास पर केंद्रित है। यह योजना बुनियादी ढांचे के विकास, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देकर वंचित अनुसूचित जाति समुदायों को सशक्त बनाने का काम कर रही है।

पीएम-अजय योजना के तहत ‘आदर्श ग्राम’ घटक के माध्यम से अनुसूचित जाति बहुल गांवों का क्षेत्र आधारित विकास किया जा रहा है। इसमें विभिन्न योजनाओं के समन्वय, ग्राम विकास योजनाओं और स्थानीय जरूरतों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त सहायता दी जाती है। यह कार्यक्रम 26 राज्यों के 597 जिलों में स्थित 47,334 गांवों को कवर करता है, जिससे 4 करोड़ से अधिक अनुसूचित जाति नागरिकों और 83 लाख से अधिक परिवारों को लाभ मिल रहा है।

बयान में आगे कहा गया है कि इस कार्यक्रम ने गांव स्तर पर योजना निर्माण और बुनियादी ढांचे की निगरानी को भी मजबूत किया है। 25,000 से अधिक गांवों में आधारभूत सुविधाओं का आकलन किया जा चुका है। इससे सड़क, जल आपूर्ति, शिक्षा, स्वच्छता और संपर्क सुविधाओं की कमियों की अधिक व्यवस्थित तरीके से पहचान करने में मदद मिली है।

सरकार ने युवाओं की भागीदारी और रोजगार सृजन पर भी विशेष जोर दिया है। कौशल विकास, स्वयं सहायता समूहों में भागीदारी और गांवों में बुनियादी ढांचे के निर्माण को अब दीर्घकालिक आर्थिक भागीदारी बढ़ाने के व्यापक प्रयास का हिस्सा बनाया गया है। बयान में कहा गया है कि इन कदमों का उद्देश्य वंचित समुदायों को स्थायी आर्थिक अवसरों से जोड़ना है।

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