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तमिलनाडु में डेल्टा के किसानों ने धान खरीद में तेजी लाने की मांग की, खुले केंद्रों पर बढ़ रहा है स्टॉक

Farmers in Tamil Nadu's Delta region have demanded an acceleration in paddy procurement, as stocks are piling up at open procurement centres.

कावेरी डेल्टा के किसानों ने तमिलनाडु सरकार से धान खरीद प्रक्रिया में तेजी लाने और प्रत्यक्ष खरीद केंद्रों (डीपीसी) से खरीदे गए धान के स्टॉक को तत्काल हटाने की मांग की है। किसानों का कहना है कि परिवहन में हो रही देरी के कारण खुले खरीद केंद्रों पर बड़ी मात्रा में धान का स्टॉक जमा हो गया है, जिससे मौजूदा ग्रीष्मकालीन फसल सीजन के दौरान नई खरीद की रफ्तार भी धीमी पड़ गई है।

कावेरी डेल्टा क्षेत्र में ग्रीष्मकालीन धान की कटाई लगभग पूरी हो चुकी है। किसानों का आरोप है कि खराब योजना के कारण हजारों बोरी धान कई दिनों से खरीद केंद्रों के खुले मैदानों में पड़े हुए हैं। उनका कहना है कि लंबे समय तक खुले में रखने से धान की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और उन किसानों की उपज की खरीद में भी देरी हो रही है, जो अब भी अपनी फसल बेचने का इंतजार कर रहे हैं।

अप्रैल से शुरू हुए अल्पकालिक ग्रीष्मकालीन धान की खेती डेल्टा क्षेत्र में लगभग 1.60 लाख एकड़ में की गई थी। धान खरीद की प्रक्रिया जून के अंतिम सप्ताह में शुरू हुई और यह अगस्त तक जारी रहने वाली है। खुले डीपीसी के अलावा सरकार ने प्वाइंट ऑफ प्रोक्योरमेंट (पीओपी) केंद्र भी स्थापित किए हैं, जहां प्रतिदिन 1,000 बोरी धान खरीदने की क्षमता है।

किसान संगठनों का आरोप है कि पिछले कुछ सप्ताह में खरीद की गति काफी धीमी हो गई है। उनके अनुसार, जिन केंद्रों पर शुरुआत में प्रतिदिन करीब 1,000 बोरी धान खरीदा जा रहा था, वहां अब केवल 500 से 600 बोरी प्रतिदिन खरीदा जा रहा है।

किसानों ने इस सुस्ती के लिए डीपीसी से तमिलनाडु सिविल सप्लाइज कॉरपोरेशन (टीएनसीएससी) के गोदामों और वहां से राइस मिलों तक खरीदे गए धान के परिवहन में हो रही देरी को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि कि सामान्य तौर पर खरीद के तुरंत बाद धान का परिवहन कर दिया जाता है लेकिन इस सीजन में ऐसा नहीं हुआ, जिसके कारण बड़ी मात्रा में धान कई दिनों तक खुले खरीद केंद्रों पर पड़ा हुआ है।

किसान प्रतिनिधियों का आरोप है कि जमा हुए स्टॉक को नहीं हटाए जाने के कारण खरीद केंद्रों का स्टाफ अतिरिक्त धान स्वीकार करने से हिचकिचा रहा है क्योंकि उन्हें केंद्रों पर और अधिक भीड़भाड़ बढ़ने का डर है। उनका कहना है कि इस स्थिति के चलते कई किसानों को अपनी कटी हुई फसल को अपने खर्च पर ही सुरक्षित रखना पड़ रहा है और वे खरीद का इंतजार कर रहे हैं।

किसानों ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक खुले में पड़े रहने से धान का वजन कम हो सकता है, उसका रंग बदल सकता है और गुणवत्ता से जुड़ी अन्य समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं। इसके अलावा इससे खरीद प्रक्रिया और धीमी होगी जबकि किसान अपनी फसल को बिना किसी देरी के बेचने की उम्मीद कर रहे हैं।

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