आठ साल का हिमांशु, जो जीवन से भरपूर था, अर्की में एक इमारत में लगी भीषण आग में दुखद रूप से मारा गया। इस आग ने उसके परिवार के लिए एक सामान्य सुबह को बुरे सपने में बदल दिया। चारों ओर से लपटें उठने लगीं और गलियारों में घना धुआं भर गया, जिससे दहशत फैल गई। उसके माता-पिता अपने शिशु को गोद में लिए, जान बचाने के लिए बेताब होकर भागने लगे। उस अफरा-तफरी में, बढ़ती आग से भयभीत हिमांशु बच निकला और यह सोचकर बाथरूम में छिप गया कि शायद इससे उसकी जान बच जाएगी।
उस पल ने हिमांशु की किस्मत तय कर दी। अपने बेटे के लापता होने से बेखबर, उसके पिता राकेश और मां ने सुरक्षित स्थान पर पहुंचने के बाद उसकी तलाश में जी-जान से जुट गए। जब हिमांशु नहीं मिला, तो उन्होंने घटनास्थल पर मौजूद स्थानीय विधायक संजय अवस्थी से संपर्क किया। तुरंत बचाव अभियान शुरू किया गया। घंटों बाद, सुबह करीब 7 बजे, बचाव दल ने बच्चे का जला हुआ शव बाथरूम से बरामद किया।
हिमांशु को अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही चोटों के कारण दम तोड़ दिया गया। बिहार से आए प्रवासी मजदूरों का यह परिवार बेहतर जीवन की उम्मीद में अर्की आया था। लेकिन उन्हें एक ऐसा असहनीय नुकसान झेलना पड़ा जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।


Leave feedback about this