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छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में पांच माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया

Five Maoists surrender in Dantewada, Chhattisgarh

31 मार्च । दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी से जुड़े पांच माओवादी कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में सुरक्षा बलों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण करने वालों में चार महिलाएं भी शामिल हैं।

यह आत्मसमर्पण समारोह कारली स्थित पुलिस लाइंस में ‘पुना मारगेम’ पहल के तहत आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य पूर्व उग्रवादियों का पुनर्वास और मुख्यधारा में शामिल करना है।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि माओवादी संगठन की घटती ताकत और निरर्थकता का हवाला देते हुए कार्यकर्ताओं ने हथियार डाल दिए और सामाजिक मुख्यधारा में लौट आए। इन पर कुल नौ लाख रुपए का इनाम घोषित किया गया था।

आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों में बीजापुर जिले के भैरमगढ़ क्षेत्र समिति के सदस्य वर्षीय सोम कडती भी शामिल थे। सोम पर पांच लाख रुपये का इनाम था।

अन्य चार भी पार्टी के सदस्य थे: लखमा ओयम (19), सरिता पोडियम (21), जोगी कल्मु (20), और मोती ओयम (19); ये सभी बीजापुर जिले के निवासी थे।

आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी कार्यकर्ताओं से मिली जानकारी के आधार पर सुरक्षा बलों ने विभिन्न माओवादी हथियार डिपो से 40 घातक हथियार बरामद किए।

इस जखीरे में आठ एसएलआर राइफलें, तीन इंसास राइफलें, एक कार्बाइन, एक .303 राइफल और पांच बीजीएल लॉन्चर शामिल थे, जिससे आतंकी समूह की क्षमताओं को बड़ा झटका लगा।

दंतेवाड़ा में माओवादी विरोधी अभियान के ठोस परिणाम देखने को मिले हैं।

2024 की शुरुआत से पुनर्वास पहल के तहत जिले में 607 माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण किया है।

इसी अवधि में, 92 माओवादियों को गिरफ्तार किया गया और 54 मुठभेड़ों में मारे गए।

दंतेवाड़ा जिले ने पड़ोसी बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा जिलों के साथ सफल संयुक्त अभियान चलाए, जिसमें कई शीर्ष माओवादी कैडरों को मार गिराया गया।

इस कार्यक्रम में कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे, जिनमें बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी; सीआरपीएफ दंतेवाड़ा रेंज के पुलिस उप महानिरीक्षक राकेश चौधरी; दंतेवाड़ा कलेक्टर देवेश ध्रुव; दंतेवाड़ा पुलिस अधीक्षक गौरव राय; और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल तथा जिला प्रशासन के अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।

बस्तर के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने कहा कि ‘पुना मारगेम’ पहल हिंसा छोड़ने वालों को पुनर्वास, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन प्रदान करती है।

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