राज्य भर में धान की कटाई में तेजी आई है, NH-44 पर स्थित ब्लॉकों के किसानों ने पानीपत में लगभग 30-40 प्रतिशत धान की कटाई कर ली है। इस तेजी के बावजूद, राज्य में पराली जलाने के मामलों में उल्लेखनीय कमी आई है, 8 अक्टूबर तक केवल पांच मामले दर्ज किए गए हैं।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, खेतों में आग लगने की पांच घटनाएं चार जिलों में दर्ज की गई हैं, जिनमें फरीदाबाद, पंचकुला और हांसी से एक-एक मामला और पलवल जिले से दो मामले शामिल हैं। राज्य में 15 सितंबर से 8 अक्टूबर की अवधि के बीच पराली जलाने के कुल सात मामले 2025 में, 177 मामले 2024 में, 277 मामले 2023 में, 80 मामले 2022 में, 62 मामले 2021 में और 268 मामले 2022 में दर्ज किए गए।
आंकड़ों के अनुसार, पिछले छह वर्षों में राज्य में कुल 268 कृषि अग्निकांड हुए, जिनमें से 2020 में 67 करनाल में, 62 कुरुक्षेत्र में, 39 कैथल में, 37 अंबाला में, 19 फतेहाबाद में और 18 यमुनानगर तथा अन्य जिलों में दर्ज किए गए। 2021 में, राज्य में पराली जलाने के मामलों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई और केवल 62 मामले सामने आए। इनमें से 21 करनाल में, 20 कुरुक्षेत्र में और 10 कैथल जिले में दर्ज किए गए।
2022 में मामलों में फिर से वृद्धि हुई और राज्य में पराली जलाने की 80 घटनाएं दर्ज की गईं। कुरुक्षेत्र में 27 मामले, करनाल में 20, कैथल में 9, अंबाला में 9 और जींद में 8 मामले सामने आए। 2023 में पराली जलाने की घटनाओं में भारी उछाल देखा गया। राज्य में धान के अवशेष जलाने के कुल 277 मामले दर्ज किए गए, जिनमें अंबाला में 56, फतेहाबाद में 29, कुरुक्षेत्र में 49, जिंद में 23, करनाल में 19, कैथल में 16, सोनीपत में 28 और यमुनानगर जिले में 28 मामले शामिल हैं।
2024 में, मामलों की संख्या घटकर 177 हो गई, जिनमें करनाल में 38, कुरुक्षेत्र में 37, अंबाला में 17, कैथल में 15, यमुनानगर में 11, सोनीपत, पलवल और फतेहाबाद में 8-8, फरीदाबाद में 12 और जींद जिले में 10 मामले शामिल हैं।
2025 में, राज्य में 15 सितंबर से 8 अक्टूबर की अवधि के दौरान पराली जलाने के मामलों में उल्लेखनीय कमी देखी गई। मामलों की संख्या घटकर सात रह गई, जिनमें से दो फरीदाबाद में दर्ज किए गए, जबकि सोनीपत, पलवल, कुरुक्षेत्र, जिंद और फतेहाबाद जिलों से एक-एक मामला सामने आया।
पानीपत में 1.82 लाख एकड़ भूमि पर धान की बुवाई की गई है, जिसमें से 1.65 लाख एकड़ में बासमती धान की बुवाई हुई है, जबकि 17,000 एकड़ में गैर-बासमती धान की बुवाई हुई है। यह जानकारी कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के पानीपत एवं करनाल उप-मंडल अधिकारी (एसडीओ) देवेंद्र कुहार ने दी।
अब तक 50,000 एकड़ में बोई गई धान की फसल की कटाई हो चुकी है, जिसमें 40,000 एकड़ में बासमती किस्म की धान की फसल और 10,000 एकड़ में गैर-बासमती किस्म की धान की फसल शामिल है। सोनीपत में 22.5 लाख एकड़ भूमि पर धान की बुवाई की गई है, जिसमें से 21.5 लाख एकड़ भूमि बासमती धान के लिए आवंटित की गई है, जबकि 10,000 एकड़ भूमि पर गैर-बासमती धान की बुवाई हुई है। कुहार ने आगे बताया कि सोनीपत में 15,000 एकड़ भूमि से बासमती धान की कटाई हो चुकी है, जबकि 9,000 एकड़ भूमि से गैर-बासमती धान की कटाई हुई है।
करनाल में कुल 45 लाख एकड़ भूमि पर बासमती धान की बुवाई की गई है, जिसमें 11 लाख एकड़ में बासमती और लगभग 34 लाख एकड़ में गैर-बासमती धान की बुवाई शामिल है। कुहार ने बताया कि करनाल जिले में धान की कुल फसल का 30 प्रतिशत काटा जा चुका है। कुहार ने बताया कि जिलों में पराली जलाने पर नजर रखने और उसे रोकने के लिए ग्राम स्तरीय समितियां गठित की गई हैं। उन्होंने आगे बताया कि कृषि, राजस्व, पंचायती राज, पशुपालन विभागों के अधिकारी और सरपंच इन समितियों का हिस्सा हैं।
कुहार ने आगे बताया कि पानीपत में पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए कुल 172 ग्राम स्तरीय समितियां और सोनीपत में 540 ग्राम स्तरीय समितियां गठित की गई हैं।

