July 25, 2026
Entertainment

सेट पर चाय परोसने से लेकर मशहूर फिल्म निर्देशक बनने तक, किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं बीआर इशारा की कहानी

From serving tea on film sets to becoming a renowned film director, B.R. Ishara’s story is nothing short of a movie script.

हिंदी सिनेमा में बीआर इशारा ने ऐसे दौर में फिल्में बनाईं, जब समाज कुछ विषयों पर खुलकर बात करने से भी हिचकता था। उनकी फिल्मों ने कई बार विवाद खड़े किए, लेकिन उन्होंने हमेशा अपनी सोच के अनुसार काम किया। बहुत कम लोग जानते हैं कि पर्दे के पीछे बड़ा नाम बनने से पहले बीआर इशारा ने फिल्मों के सेट पर चाय तक परोसी थी। उनका यह संघर्ष ही आगे चलकर सबसे बड़ी ताकत बना।

बीआर इशारा का जन्म 7 सितंबर 1934 को हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में हुआ था। उनका असली नाम रोशन लाल शर्मा था। बचपन से ही कुछ अलग करने की चाह इशारा को कम उम्र में ही मुंबई लेकर आ गई।

शुरुआती दिनों में उन्होंने छोटे-छोटे काम करके अपना गुजारा किया। कहा जाता है कि मुंबई आने के बाद उन्हें ‘बाबू’ नाम मिला। बाद में उन्होंने अपने नाम में ‘राम’ जोड़ा और लेखक बनने पर ‘इशारा’ तखल्लुस अपनाया। इसके बाद वह हमेशा के लिए ‘बाबू राम इशारा’ के नाम से जाने गए।

मुंबई में उनका सफर आसान नहीं था। उन्होंने फिल्मों के सेट पर सबसे पहले ‘टी-बॉय’ के रूप में काम किया और कलाकारों व तकनीशियनों को चाय परोसी। इसके बाद उन्हें ‘स्पॉट बॉय’ का काम मिला, जहां सेट की छोटी-बड़ी जिम्मेदारियां निभानी पड़ती थीं। यही काम करते हुए उन्होंने बहुत करीब से फिल्म निर्माण की पूरी प्रक्रिया देखी। कैमरे के पीछे होने वाले हर काम को समझा और धीरे-धीरे उनकी रुचि कहानी लिखने में बढ़ने लगी। कुछ समय बाद उन्होंने लेखकों की मदद करनी शुरू की और फिर खुद कहानियां लिखने लगे। यही अनुभव उन्हें निर्देशन की दुनिया तक ले गया।

बीआर इशारा ने 1964 में फिल्म ‘आवारा बादल’ से निर्देशन की शुरुआत की, लेकिन उन्हें असली पहचान 1970 में आई फिल्म ‘चेतना’ से मिली। यह फिल्म एक सेक्स वर्कर की कहानी पर आधारित थी। उस दौर में ऐसे विषय पर फिल्म बनाना बहुत बड़ा जोखिम माना जाता था। फिल्म की कहानी अपने समय से काफी आगे थी। इस वजह से इसकी काफी चर्चा हुई और विवाद भी हुए, लेकिन दर्शकों ने इसे पसंद किया। इसी फिल्म से अभिनेत्री रेहाना सुल्तान को बड़ी पहचान मिली। बाद में 1984 में बीआर इशारा ने रेहाना सुल्तान से शादी भी की।

बीआर इशारा ने हमेशा नए कलाकारों पर भरोसा किया। उन्होंने फिल्म ‘चरित्र’ के जरिए भारतीय क्रिकेटर सलीम दुर्रानी को फिल्मों में मौका दिया। इसी फिल्म से अभिनेत्री परवीन बाबी और संगीतकार बप्पी लाहिड़ी को भी शुरुआती पहचान मिली। उन्होंने अमिताभ बच्चन, जया भादुड़ी, शत्रुघ्न सिन्हा, रीना रॉय, डैनी डेन्जोंगपा, विजय अरोड़ा, राज किरण और रजा मुराद जैसे कई कलाकारों को शुरुआती दौर में अहम अवसर दिए।

1964 से 1996 के बीच बीआर इशारा ने करीब 35 फिल्मों का निर्देशन किया। उनके करियर ‘मिलाप’, ‘मन जाइए’, ‘एक नजर’, ‘जरूरत’, ‘लोग क्या कहेंगे’, ‘घर की लाज’, ‘वो फिर आएगी’ और ‘सौतेला भाई’ जैसी फिल्में की प्रमुख फिल्मों में शामिल हैं। उनकी फिल्म ‘वो फिर आएगी’ सिल्वर जुबली हिट रही, जबकि ‘सौतेला भाई’ को समीक्षकों ने काफी सराहा। हालांकि, उनकी कई फिल्मों को उस समय बी-ग्रेड कहकर आलोचना भी झेलनी पड़ी, लेकिन बाद में फिल्म विशेषज्ञों ने माना कि उनकी सोच अपने समय से काफी आगे थी।

जीवन के आखिरी वर्षों में उन्होंने फिल्में बनाना लगभग छोड़ दिया। लंबे समय तक बीमारी से जूझने के बाद 24 जुलाई 2012 को मुंबई के एक अस्पताल में उनका निधन हो गया। वह 77 वर्ष के थे।

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