N1Live National गैस एजेंसी मालिक ने कालाबाजारी के लिए जमा किए थे 459 कमर्शियल गैस सिलेंडर, पुलिस ने मारा छापा
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गैस एजेंसी मालिक ने कालाबाजारी के लिए जमा किए थे 459 कमर्शियल गैस सिलेंडर, पुलिस ने मारा छापा

Gas agency owner had hoarded 459 commercial gas cylinders for black marketing, police raided

26 मार्च । दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (डब्ल्यूआर-आई) ने खुफिया जानकारी के आधार पर दिल्ली के रानहोला क्षेत्र में कई स्थानों पर छापेमारी की, जिसमें एलपीजी सिलेंडरों के अवैध भंडारण और रिफिलिंग रैकेट का पर्दाफाश हुआ। छापेमारी के दौरान 459 खाली गैस सिलेंडर बरामद हुए हैं।

एलपीजी की कमी को लेकर बनी आशंकाओं को देखते हुए जमाखोरों को पकड़ने के लिए एक विशेष टीम का गठन किया गया। इंस्पेक्टर प्रदीप के नेतृत्व में एक विशेष टीम को रानहोला क्षेत्र में एलपीजी सिलेंडरों की जमाखोरी के संबंध में गुप्त सूचना मिली।

इसके बाद टीम ने निथोली रोड पर स्थित एचपी बालाजी गैस एजेंसी पर छापेमारी की। छापेमारी के दौरान गैस एजेंसी के मालिक सुशील कुमार सिंघल निवासी निहाल विहार को एलपीजी सिलेंडरों की अवैध जमाखोरी में सक्रिय रूप से लिप्त पाया गया। खाद्य आपूर्ति अधिकारी (एफएसओ) जग प्रवेश को तुरंत मौके पर बुलाया गया, जिन्होंने आवश्यक कार्रवाई की।

बरामद सिलेंडर बिक्री क्षेत्र प्रबंधक (हिंदुस्तान पेट्रोलियम गैस) संजय कुमार मेहता को सौंप दिए गए। इसके साथ ही पुलिस स्टेशन क्राइम ब्रांच में मामला दर्ज किया गया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। छापेमारी के दौरान कुल 459 खाली व्यावसायिक सिलेंडर बरामद किए गए हैं।

गैस एजेंसी का मालिक स्टॉक पर नियंत्रण का दुरुपयोग करते हुए एलपीजी सिलेंडरों की अवैध जमाखोरी और कालाबाजारी में लिप्त था। निर्धारित नियमों और विनियमों का पालन करने के बजाय उसने बिना किसी वैध अनुमति के अपने एजेंसी परिसर में बड़ी संख्या में व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर (इंडेन और भारत पेट्रोलियम) गुप्त रूप से जमा कर लिए थे।

गैस आपूर्ति में व्यवधान और परिणामस्वरूप मांग-आपूर्ति के अंतर का लाभ उठाते हुए, आरोपी ने कृत्रिम कमी पैदा करने के लिए सिलेंडरों को वैध वितरण चैनलों से जानबूझकर रोक रखा था। जमा किए गए सिलेंडरों को खुले बाजार में बढ़ी हुई कीमतों पर बेचकर अवैध लाभ कमाने का इरादा था। अवैध स्टॉक को नियमित व्यावसायिक इन्वेंट्री की आड़ में रखा गया था, ताकि प्रवर्तन एजेंसियों को संदेह न हो और वे पकड़ में न आएं।

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