असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई पर एक गंभीर सवाल उठाया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर पोस्ट कर कहा, “आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस में गौरव गोगोई ने एक ऐसा खुलासा किया, जिसके बारे में मुझे भी पहले पता नहीं था कि तक्षशिला (तक्षशिला) इस्लामाबाद में नहीं, बल्कि पंजाब के रावलपिंडी जिले में है।”
मुख्यमंत्री सरमा ने आगे कहा कि गौरव गोगोई के पाकिस्तान वीजा में सिर्फ लाहौर, कराची और इस्लामाबाद जाने की अनुमति थी। ऐसे में सवाल उठता है कि वह तक्षशिला कैसे गए, जो सीधे रावलपिंडी जिले में आता है और इस्लामाबाद कैपिटल टेरिटरी के बाहर है।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के इमिग्रेशन नियमों के तहत, वीजा में तय शहरों से बाहर यात्रा करने की इजाजत खास अनुमति के बिना नहीं है, तो सवाल सीधा, तथ्यात्मक और जायज है कि रावलपिंडी जिले के लिए वीजा मंजूरी न होने के बावजूद, किसने उन्हें तक्षशिला जाने में मदद की?
मुख्यमंत्री सरमा ने यह भी कहा कि रावलपिंडी में पाकिस्तानी सेना का जनरल हेडक्वार्टर (जीएचक्यू) स्थित है। यह हाई-सिक्योरिटी जिला है और आम नागरिक बिना विशेष अनुमति वहां नहीं जा सकते। ऐसे में यह दौरा केवल किसी संस्थागत व्यवस्था के जरिए ही संभव हो सकता था। ये तथ्य और भी गंभीर हो जाते हैं क्योंकि यह सीधे इस बात की ओर इशारा करता है कि गोगोई का दौरा सामान्य वीजा नियमों के दायरे में नहीं था।
सरमा ने यह साफ किया कि मामले में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए। यह इसलिए भी अहम है क्योंकि वीजा में रावलपिंडी का नाम नहीं था, पाकिस्तान के वीजा नियमों में शहर-विशिष्ट यात्रा के सख्त नियम हैं, और रावलपिंडी हाई-सिक्योरिटी जिले में आता है। ऐसे में किसी भी नागरिक का वहां पहुंचना सामान्य तौर पर असंभव है। उन्होंने कहा कि इन सभी तथ्यों के स्पष्ट और पारदर्शी स्पष्टीकरण की जरूरत है।


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