हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने घोषणा की है कि अनुसूचित जाति के कल्याण के लिए उत्कृष्ट कार्य कर रही पंचायतों को दिए जाने वाले प्रोत्साहन अनुदान को 50,000 रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर दिया जाएगा। उन्होंने प्रत्येक पुलिस स्टेशन में एक जांच शाखा स्थापित करने की भी घोषणा की।
अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम और नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों के कार्यान्वयन की समीक्षा के लिए गठित राज्य स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक की अध्यक्षता सैनी कर रहे थे। विकास एवं पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कृष्ण कुमार बेदी भी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्कृष्ट पंचायतों के चयन के मानदंडों में अनुसूचित जातियों के विरुद्ध किसी भी प्रकार के अत्याचार न होना, अनुसूचित जाति निधि का पूर्ण उपयोग, गांवों में नशा मुक्ति अभियान चलाना, पराली जलाने से रोकना और पेयजल समस्याओं का समाधान करना शामिल है। इसके लिए राज्य, जिला और उपमंडल स्तर पर पंचायत प्रोत्साहन राशि का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के मामलों में, अदालत में 60 दिनों के भीतर आरोपपत्र दाखिल किया जाना चाहिए ताकि ऐसे मामलों का शीघ्र निपटारा हो सके। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा लागू किए गए तीन नए आपराधिक कानूनों के तहत भी 60 दिनों के भीतर आरोपपत्र दाखिल करने का प्रावधान है। इन मामलों के लिए अलग-अलग जांच अधिकारियों की नियुक्ति भी की जानी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2021 से अनुसूचित जाति के अलावा अन्य महिलाओं के खिलाफ अपराधों में कमी आई है। इसके अलावा, लूटपाट, संपत्ति संबंधी अपराधों और धमकियों के मामलों में भी कमी आई है। उन्होंने चेतावनी दी कि अनुसूचित जाति के खिलाफ अत्याचार या उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही, उन्होंने कहा कि यदि कोई झूठी शिकायत दर्ज कराता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आपसी समझौते के मामलों में यह जांच की जानी चाहिए कि समझौता दबाव या प्रलोभन के तहत तो नहीं किया गया था।


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